रोहित रजक रिपोर्ट भोपाल। बीना विधानसभा क्षेत्र (क्रमांक 35) से कांग्रेस की विधायक एड. निर्मला सप्रे ने 2023 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर अपनी पहचान बनाई। राजनीति में सक्रिय, जमीनी और महिलाओं की मजबूत आवाज़ मानी जाने वाली निर्मला सप्रे ने अपनी मेहनत से क्षेत्र में कांग्रेस का झंडा बुलंद किया।
परिचय
निर्मला सप्रे का जन्म 1 मार्च 1977 को बीना में हुआ। उनके पिता श्री नाथूराम भवौरिया और पति डॉ. राजेश कुमार सप्रे हैं। दो पुत्रों की माता निर्मला सप्रे पढ़ाई में भी अव्वल रहीं — उन्होंने एम.एस.सी., एम.फिल. और एल.एल.बी. की डिग्रियाँ हासिल कीं। राजनीति से पहले वे खेती और सामाजिक कार्यों में सक्रिय थीं।
राजनीतिक सफर
निर्मला सप्रे ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत युवा कांग्रेस से की।
वर्ष 2009 में वे युवा कांग्रेस प्रदेश सचिव बनीं।
2011 में महिला कांग्रेस प्रदेश सचिव का दायित्व संभाला।
2013 से 2020 तक महिला कांग्रेस प्रदेश महामंत्री रहीं।
2020 में महिला कांग्रेस जिला अध्यक्ष (सागर ग्रामीण) बनीं।
2023 में पीसीसी डेलीगेट बनीं और उसी वर्ष विधानसभा चुनाव लड़ा।
2023 का चुनाव और जीत
बीना विधानसभा सीट (अनुसूचित जाति आरक्षित) पर कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरीं निर्मला सप्रे का मुकाबला भाजपा उम्मीदवार महेश राय से हुआ।
तीव्र मुकाबले में निर्मला सप्रे ने 6,155 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की, और पहली बार विधानसभा की सदस्य बनीं।
इस जीत के साथ उन्होंने कांग्रेस को बीना में एक नई ताकत दी।
विकास कार्य और जनता से जुड़ाव
विधायक बनने के बाद निर्मला सप्रे ने अपने क्षेत्र में कई विकास कार्यों को प्राथमिकता दी —
बीना को जिला बनाने की मांग प्रमुखता से उठाई।
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पानी और शिक्षा सुविधाओं को लेकर लगातार आवाज़ उठाई।
जनता की समस्याओं को सुनने और समाधान के लिए लोक संवाद कार्यक्रम आयोजित किए।
क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहीं।
राजनीतिक मोड़
मई 2024 में निर्मला सप्रे ने अचानक कांग्रेस छोड़कर भाजपा का रुख किया, जिससे मध्यप्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई। कांग्रेस ने इसे “दलबदल” करार देते हुए उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की। हालांकि भाजपा की ओर से इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई।
उनका यह कदम चर्चा और विवाद दोनों का विषय बना रहा।
एडवोकेट निर्मला सप्रे का राजनीतिक सफर संघर्ष, समर्पण और बदलाव से भरा रहा है। कांग्रेस की युवा नेता से लेकर विधायक बनने तक उन्होंने लंबा रास्ता तय किया।
आज वे बीना की राजनीति में एक जाना-पहचाना चेहरा हैं — जो जनता के मुद्दों को उठाने में हमेशा आगे रहती हैं।
