कामना कासोटिया भोपाल:
जनसेवा के पथ पर अग्रसर – श्रीमती संपतिया उइके की प्रेरणादायक कहानी
मण्डला विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी की विधायक श्रीमती संपतिया उइके आज एक ऐसा नाम हैं, जो जनसेवा, समर्पण और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बन चुका है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को 13,874 वोटों से हराकर एक ऐतिहासिक जीत दर्ज की। यह जीत सिर्फ एक चुनावी परिणाम नहीं था, बल्कि जनता के भरोसे का प्रतीक था, जो उन्होंने वर्षों की सेवा और संघर्ष के बल पर अर्जित किया।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
श्रीमती संपतिया उइके का जन्म 4 सितम्बर 1967 को मण्डला जिले के सुकरी गाँव में हुआ। उनके पिता श्री बीनाराम वेकम एक आदर्शवादी व्यक्ति थे, जिनके संस्कारों ने संपतिया जी के जीवन की दिशा तय की। बी.ए. तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने कृषि को अपने जीवन का व्यवसाय चुना, और साथ ही संगीत व खेल में भी उनकी विशेष रुचि रही है।
राजनीतिक यात्रा
उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से हुई। इसके बाद वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ीं और भारतीय जनता पार्टी की सक्रिय सदस्य बनीं। वर्ष 1990 में वे जिला पंचायत की सदस्य बनीं और फिर 1997 में जिला पंचायत अध्यक्ष का पद संभाला।
2000 से 2004 तक उन्होंने ग्राम टिकरिया की सरपंच के रूप में कार्य किया। इसके बाद 2004 से 2017 तक वे राज्य महिला आयोग की सदस्य रहीं और फिर राज्यसभा सांसद बनीं। राज्यसभा सदस्य के रूप में उन्होंने कई अहम मुद्दों पर प्रभावशाली ढंग से आवाज़ उठाई, विशेषकर महिला, बाल विकास और जनजातीय कल्याण से जुड़े मामलों पर।
विधायक के रूप में योगदान
2023 में मण्डला से विधायक बनने के बाद, श्रीमती उइके ने क्षेत्र के समग्र विकास को प्राथमिकता दी। उनके प्रमुख विकास कार्यों में शामिल हैं:
- सड़क और बिजली सुविधा में सुधार: कई गाँवों में नई सड़कों का निर्माण हुआ और जहाँ-जहाँ बिजली नहीं थी, वहां कनेक्शन दिलाए गए।
- स्वास्थ्य सेवाएं: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति सुधारी गई और मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयों की शुरुआत हुई।
- शिक्षा का विस्तार: सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती कराई गई और बच्चों को छात्रवृत्ति योजनाओं से जोड़ा गया।
- महिला सशक्तिकरण: महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक सहायता प्रदान कर उनके स्वरोज़गार को बढ़ावा दिया गया।
- कृषि क्षेत्र में कार्य: किसानों को नई तकनीक से जोड़ने और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में अग्रणी भूमिका निभाई।
व्यक्तिगत जीवन
श्रीमती संपतिया उइके एक विधवा हैं। उनके पति स्व. श्री संजय उइके भी सामाजिक क्षेत्र से जुड़े रहे। उनके एक पुत्र और तीन पुत्रियाँ हैं। आज भी वे सादगी और सहजता का जीवन जीती हैं और हर वर्ग से संवाद बनाकर जनसमस्याओं को सुनती हैं।
श्रीमती संपतिया उइके ने जनसेवा को अपना धर्म माना है। उनकी राजनीतिक यात्रा यह दर्शाती है कि यदि नीयत साफ हो और जनसेवा का संकल्प प्रबल हो, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। मण्डला की जनता ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वे अपने क्षेत्र के विकास के लिए एक मजबूत और ईमानदार नेतृत्व को पसंद करते हैं।
