रिपोर्ट, काजल जाटव: मध्य प्रदेश की राजनीति में युवा चेहरों की अपनी एक अलग पहचान है। इन्हीं में से एक हैं सुरेन्द्र सिंह ‘हनी’ बघेल, जो धार जिले की कुक्षी विधानसभा सीट (198) से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लोकप्रिय विधायक हैं। तीन बार लगातार चुनाव जीतकर उन्होंने साबित किया है कि जनता का विश्वास उन्हें निरंतर मिल रहा है। उनका राजनीतिक सफर छात्र जीवन से शुरू होकर विधानसभा और मंत्रिमंडल तक पहुंचा।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
सुरेन्द्र सिंह बघेल का जन्म 17 मार्च 1977 को बड़ौदा (गुजरात) में हुआ। उनके पिता, स्व. प्रताप सिंह बघेल, स्वयं भी सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा धार जिले में हुई और बाद में उन्होंने बी.कॉम. की डिग्री प्राप्त की। छात्र जीवन से ही वे अनुशासनप्रिय और सक्रिय व्यक्तित्व के रूप में पहचाने जाते थे।
बचपन से ही खेलों में गहरी रुचि रखने वाले बघेल एन.सी.सी. एयरविंग के कैडेट (1994) रहे और 1996 में स्कूल बास्केटबॉल टीम का प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय स्तर पर किया। यही कारण है कि आज भी उनके व्यक्तित्व में ऊर्जा और नेतृत्व क्षमता स्पष्ट झलकती है।
राजनीतिक सफर की शुरुआत
बघेल का राजनीति में सक्रिय प्रवेश 2008 में हुआ, जब उन्हें मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस का प्रदेश सचिव बनाया गया। उसी वर्ष वे धार जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष भी चुने गए। उनके संगठनात्मक कौशल और लोकप्रियता को देखते हुए 2011 में उन्हें युवा कांग्रेस लोकसभा उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली।
युवा राजनीति में सक्रिय रहते हुए उन्होंने ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में पैठ बनाई। यही मजबूत जनसंपर्क उन्हें आगे विधानसभा तक ले गया।
विधायक और मंत्री के रूप में योगदान
सुरेन्द्र सिंह बघेल पहली बार 2013 में 14वीं विधानसभा के लिए कुक्षी से विधायक चुने गए। इसके बाद उन्होंने लगातार जनता के बीच काम जारी रखा। उनके कार्यों का परिणाम यह रहा कि 2018 के विधानसभा चुनाव में वे दूसरी बार विधायक बने।
जनवरी 2019 से मार्च 2020 तक वे मध्य प्रदेश सरकार में नर्मदा घाटी विकास और पर्यटन विभाग के मंत्री रहे। मंत्री रहते हुए उन्होंने पर्यटन विकास की कई योजनाओं को आगे बढ़ाया और नर्मदा घाटी परियोजनाओं से जुड़े विकास कार्यों की निगरानी की।
2023 में वे तीसरी बार विधायक निर्वाचित हुए, जिससे यह सिद्ध हुआ कि क्षेत्र की जनता में उनका प्रभाव और विश्वास अब भी कायम है।
विकास कार्य और प्राथमिकताएँ
बघेल का मुख्य ध्यान हमेशा से ग्रामीण विकास और शिक्षा पर रहा है। उन्होंने आदिवासी अंचलों में सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं को बढ़ावा देने का प्रयास किया।
मंत्री रहते हुए उन्होंने कुक्षी क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाओं को आगे बढ़ाने, स्थानीय रोजगार सृजन और किसानों की समस्याओं को उठाने का काम किया। उनकी रुचि केवल राजनीति तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे सामाजिक कार्यों, साहित्य अध्ययन और खेलों में भी सक्रिय हैं।
मतदाता आधार और लोकप्रियता
कुक्षी क्षेत्र में उनका वोट बैंक मजबूत माना जाता है, विशेषकर आदिवासी और ग्रामीण मतदाताओं के बीच। उनकी जमीनी पकड़ और जनता से सीधा संवाद उनकी सबसे बड़ी ताकत है। युवाओं और किसानों के बीच उनकी सक्रियता ने उन्हें लोकप्रिय बनाया है।
2013 और 2018 के चुनावों में उन्होंने भाजपा उम्मीदवारों को हराकर अपनी स्थिति मजबूत की। वहीं 2023 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने तीसरी बार जीत दर्ज कर साबित किया कि जनता अब भी उन पर भरोसा करती है।
विवाद और चुनौतियाँ
हर राजनीतिक जीवन की तरह सुरेन्द्र सिंह बघेल का सफर भी विवादों से अछूता नहीं रहा।
- मंत्री पद के दौरान नर्मदा घाटी विकास परियोजनाओं से जुड़े फैसलों पर विपक्ष ने सवाल उठाए।
- पर्यटन विभाग की कुछ योजनाओं में धीमी प्रगति को लेकर भी उन पर आलोचनाएँ हुईं।
- कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी में भी कभी-कभी उनका नाम उछलता रहा।
हालाँकि, इन विवादों के बावजूद उन्होंने अपनी राजनीतिक साख और लोकप्रियता को बनाए रखा।
सुरेन्द्र सिंह ‘हनी’ बघेल आज कुक्षी विधानसभा क्षेत्र के मजबूत नेता के रूप में जाने जाते हैं। छात्र जीवन से राजनीति में कदम रखकर तीन बार विधायक और एक बार मंत्री बनने तक का उनका सफर उनकी मेहनत और जनता से जुड़े रहने की आदत को दर्शाता है।
उनकी पहचान एक युवा, ऊर्जावान और जमीनी नेता के रूप में है, जो ग्रामीण और आदिवासी विकास को अपनी प्राथमिकता मानते हैं। आने वाले समय में उनसे अपेक्षा रहेगी कि वे अपने क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दों पर और ठोस पहल करें।
