कामना कासोटिया भोपाल:
ओम प्रकाश धुर्वे — जनपथ से संघर्ष और जीत
ओम प्रकाश धुर्वे का जन्म 13 मई 1961 को ग्राम रुस्सा, जिला डिंडोरी (मध्यप्रदेश) में हुआ था। शिक्षा की दृष्टि से उन्होंने बी.एस.सी. प्रथम वर्ष किया है और माध्यमिक शिक्षा पूरा की है।
उनका व्यवसाय खेती है, साथ ही सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं। विवाहेतर स्थिति में विवाहित, दो पुत्र हैं।
राजनीतिक जीवन में ओम प्रकाश धुर्वे बीजेपी से जुड़े हुए हैं। उन्होंने पहली बार 2013 में शाहपुरा(ST) विधान सभा सीट से जीत दर्ज की थी, जब उन्होंने कांग्रेस की उम्मीदवार गंगा बाई उरेटी को बड़ी मतों के अंतर से हराया।
इसके बाद 2018 में उन्हें हार मिली थी — कांग्रेस के भूपेंद्र मारावी (बाब्लू) ने इस सीट अपने नाम कर ली।
विजय 2023: कितने वोटों से जीते?
- 2023 विधानसभा चुनाव में ओम प्रकाश धुर्वे ने भूपेंद्र मारावी (बाब्लू) को हराया।
- उन्हें कुल 84,844 वोट मिले, जबकि भूपेंद्र मारावी को 79,227 वोट मिले।
- इस प्रकार उनकी जीत का अंतर 5,617 वोट का रहा।
- वोट प्रतिशत की दृष्टि से: धुर्वे को लगभग 38.23%, मारावी को लगभग 35.70% वोट प्राप्त हुए।
पूर्व संघर्ष और हार
- 2018 में: भूपेंद्र मारावी ने जीत दर्ज की थी। मारावी को ~88,687 वोट मिले, धुर्वे को ~54,727 वोट मिले थे।
- जीत का अंतर बहुत बड़ा था — लगभग 33,960 वोटों का।
- 2013 में: धुर्वे ने यह सीट जीती थी, कुल ~76,796 वोट पाकर; गंगा बाई को ~44,115 वोट मिले थे। अंतर लगभग 32,681 वोटों का था।
मंत्री के रूप में भूमिका
ओम प्रकाश धुर्वे ने अपने पूर्व कार्यकाल में विभिन्न विभागों में मंत्री की भूमिका निभाई:
- फूड, सिविल सप्लाइज एंड कन्ज़्यूमर प्रोटेक्शन विभाग
- श्रम (Labour) विभाग
- अन्य सामाजिक कार्य, आदिवासी कल्याण, महिला एवं बाल विकास आदि विभागों में भी हिस्सेदारी रही है।
विकास कार्य और चुनौतियाँ
विकास कार्यों के बारे में सार्वजनिक रूप से बहुत सटीक, अद्यतन और विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है कि उन्होंने 2023 के बाद या अभी तक क्या योजनाएँ पूरी करायी हों। कुछ स्रोतों में यह ज़िक्र है कि क्षेत्र में सड़क, जल, सामाजिक सेवाएँ आदि में सरकार की योजनाओं के अंतर्गत सामान्य विकास हो रहा है, लेकिन धुर्वे द्वारा विशेष कौन‑सी परियोजनाएँ शुरू/पूरा हुई हैं, उस बारे में विश्वसनीय समाचार अभी नहीं मिला।
उम्मीदें और नजर
ओम प्रकाश धुर्वे के लिए अब चुनौतियाँ होंगी कि वे 2023 की जीत के बाद अपने वादों को पूरा कर पायें। क्षेत्र की मुख्य चुनौतियाँ ऐसी हैं:
- सड़क मार्गों की मजबूती और गाँवों को जोड़ने वाली सड़कों का विकास
- पेयजल, बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं की पर्याप्त पहुँच
- स्कूल‑कॉलेज, कौशल विकास एवं रोजगार के अवसर
- आदिवासी समुदायों के कल्याण हेतु विशेष योजनाएँ
अगर यह कहा जाए कि जनता की अपेक्षाएँ काफी ऊँची हैं, तो गलत नहीं होगा — और जीत का मार्जिन ज्यादा बड़ा नहीं होने के कारण जिम्मेदारी भी बढ़ गई है।
