रिपोर्ट, काजल जाटव: मध्यप्रदेश की राजनीति में आदिवासी समाज का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा है। इन्हीं में से एक नाम है प्रताप ग्रेवाल, जो कांग्रेस पार्टी के सक्रिय और लोकप्रिय नेता हैं। धार जिले की सरदारपुर विधानसभा सीट से तीन बार विधायक बने प्रताप ग्रेवाल अपने सरल स्वभाव, सामाजिक जुड़ाव और राजनीतिक सक्रियता के लिए जाने जाते हैं।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

प्रताप ग्रेवाल का जन्म 11 अप्रैल 1967 को सरदारपुर, जिला धार में हुआ। उनके पिता श्री छिपालाल ग्रेवाल एक सम्मानित व्यक्तित्व थे। प्रताप ग्रेवाल ने स्नातक (B.A.) और कानून (LL.B.) की शिक्षा प्राप्त की। शिक्षा के बाद वे एडवोकेट के रूप में कार्य करने लगे। साथ ही वे खेती-किसानी से भी जुड़े रहे। पारिवारिक जीवन में वे विवाहित हैं। उनकी दो पत्नियाँ – श्रीमती शोभा ग्रेवाल और श्रीमती सुनीता ग्रेवाल हैं। उनके तीन संतानें (दो पुत्र और एक पुत्री) हैं।

राजनीति में प्रवेश

प्रताप ग्रेवाल का राजनीति में प्रवेश छात्र जीवन से ही हो गया था। वर्ष 1983 में वे विद्यालयीन छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए। यही उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत थी। इसके बाद वे स्थानीय स्तर पर संगठन से जुड़े और 1999 से 2002 तक नगर पंचायत सरदारपुर के अध्यक्ष बने। इस दौरान उन्होंने कस्बे में विकास कार्यों और मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित किया।

1999 से 2005 तक उन्होंने आदिवासी विकास परिषद के ब्लॉक अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। आदिवासी समाज की समस्याओं और विकास योजनाओं को लेकर उनकी सक्रियता ने उन्हें एक सशक्त जननेता के रूप में पहचान दिलाई।

विधायक के रूप में सफर

प्रताप ग्रेवाल पहली बार 2008 में सरदारपुर से कांग्रेस पार्टी के टिकट पर तेरहवीं विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। यहाँ से उनकी राजनीतिक यात्रा ने गति पकड़ी। वे आदिवासी और ग्रामीण समाज में विशेष लोकप्रियता हासिल करने लगे।

2018 में वे दोबारा विधायक बने और विधानसभा में अपनी सक्रियता के लिए चर्चित रहे। शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय विकास के मुद्दों पर उन्होंने लगातार आवाज़ उठाई।

2023 में तीसरी बार जनता ने उन पर भरोसा जताया और सरदारपुर विधानसभा से विजयी बनाकर भेजा। यह उनकी कार्यकुशलता और जनता से गहरे जुड़ाव का परिणाम है।

कार्य और उपलब्धियाँ

  1. आदिवासी विकास – विधायक और ब्लॉक अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने आदिवासी समाज की शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी समस्याओं पर कई बार पहल की।
  2. स्थानीय विकास कार्य – सरदारपुर नगर पंचायत अध्यक्ष रहते उन्होंने सड़क, पानी और साफ-सफाई की योजनाओं को प्राथमिकता दी।
  3. कृषि और किसान – स्वयं किसान होने के नाते उन्होंने किसानों की समस्याओं को विधानसभा में मजबूती से रखा।
  4. युवाओं के लिए प्रयास – छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाले प्रताप ग्रेवाल ने शिक्षा और युवाओं को रोज़गार के अवसर दिलाने की दिशा में काम किया।

वोट और जनाधार

सरदारपुर विधानसभा आदिवासी बहुल क्षेत्र है। यहाँ कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला रहता है। प्रताप ग्रेवाल ने 2008, 2018 और 2023 में लगातार चुनाव जीतकर यह साबित किया कि उनका जनाधार मजबूत है। उनकी छवि एक ज़मीनी नेता की रही है, जो गाँव-गाँव जाकर जनता से सीधे संवाद करते हैं।

विवाद और आलोचनाएँ

हालाँकि प्रताप ग्रेवाल का राजनीतिक करियर अपेक्षाकृत साफ-सुथरा रहा है, फिर भी कुछ विवाद समय-समय पर सामने आए।

  • स्थानीय गुटबाज़ी – कांग्रेस के भीतर गुटबाज़ी को लेकर उनका नाम जुड़ता रहा है। विरोधी दल अक्सर आरोप लगाते हैं कि आंतरिक राजनीति के कारण कई बार विकास कार्य प्रभावित होते हैं।
  • विकास की गति पर सवाल – विपक्षी दलों ने उन पर आरोप लगाया कि सरदारपुर क्षेत्र में अपेक्षित गति से विकास कार्य नहीं हो पाए।
  • व्यक्तिगत जीवन की चर्चा – दो विवाह होने के कारण वे कई बार राजनीतिक आलोचना का सामना कर चुके हैं, हालांकि इसका सीधा असर उनकी राजनीतिक लोकप्रियता पर नहीं पड़ा।

प्रताप ग्रेवाल का राजनीतिक जीवन जनता से गहरे जुड़ाव और सामाजिक सरोकारों पर आधारित रहा है। तीन बार विधायक बनने के बाद उन्होंने सरदारपुर की राजनीति में अपनी सशक्त पकड़ बनाए रखी है। आदिवासी समाज की आवाज़ बनकर उन्होंने विधानसभा में अपनी भूमिका निभाई। विवादों और आलोचनाओं के बावजूद, उनका कद कांग्रेस पार्टी में लगातार मज़बूत हुआ है।

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