रिपोर्ट, काजल जाटव: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता श्री महेंद्र हार्डिया इंदौर-5 विधानसभा से लगातार पांच बार विधायक बने हैं। वह अब मजबूत और भरोसेमंद नेता बन गए हैं। छात्र राजनीति से लेकर राज्य मंत्री बनने तक का उनका रास्ता संघर्ष, मेहनत और संगठन का परिणाम है।
प्रारंभिक जीवन और पढ़ाई
22 अगस्त 1953 को इंदौर में महेंद्र हार्डिया का जन्म हुआ था। उनके घर का माहौल आसान और सामान्य था। उनके पिता, स्वर्गीय श्री केवलचंद हार्डिया, ने उन्हें पढ़ाई और अच्छे संस्कार सिखाए। उन्होंने बी.एस-सी. और एम.ए. की पढ़ाई की। पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें खेलों और समाज सेवा में भी रुचि रही।
खेलों में वे छात्र जीवन में सक्रिय थे। 1971 में उन्होंने मध्य प्रदेश की स्कूली वॉलीबॉल टीम में हिस्सा लिया। वे देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की वेस्ट जोन वॉलीबॉल प्रतियोगिताओं में भी भाग लिए। इस समय उनका नेतृत्व कौशल भी दिखा।
छात्र राजनीति और इमरजेंसी का समय
- 1971 में गुजराती उच्च माध्यमिक विद्यालय के छात्र संघ के प्रमुख बने।
- 1974 में होलकर विज्ञान महाविद्यालय के छात्र संघ के अध्यक्ष रहे।
- 1979 में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के छात्र संघ के अध्यक्ष बने।
- 1980 में पूरे प्रदेश के छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए।
1975 में इमरजेंसी के दौरान, उन्हें माओवादी एक्ट के तहत जेल जाना पड़ा। ये अनुभव उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ था। इसके बाद वह मजबूत संगठनकर्ता बन गए।
नगरपालिका से विधानसभ तक
1983 से 1988 तक महेंद्र हार्डिया इंदौर के नगर निगम के पार्षद थे। इस दौरान उन्होंने जनता की समस्याएं सुनीं और हल किए।
1987 में वे देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की सीनेट के सदस्य भी बने।
1990 में वह भाजपा के इंदौर उपाध्यक्ष बने। 1994 से 2004 तक जिलाध्यक्ष रहे। इस समय उन्होंने संगठन को मजबूत किया। इस दौरान वह समाज की मदद भी करते रहे। उन्होंने कुशवाह समाज के उपाध्यक्ष का काम भी किया।
विधायक और मंत्रीकाल
2003 में, वे पहली बार इंदौर-5 से विधायक चुने गए। उसके बाद, वे लगातार जीतते गए।
- 2008: फिर से जीते और सरकार में मंत्री बन गए। उन्होंने लोक स्वास्थ्य, परिवार, मेडिकल शिक्षा, आयुष, और तकनीकी शिक्षा संभाली।
- 2013: फिर से जीते और विधायक बने।
- 2018: चौथी बार चुनाव जीते। इस बार मुकाबला कड़ा था।
- 2023: पाँचवीं बार विधायक बने। भाजपा के मजबूत नेता बन गए।
कार्य और उपलब्धियां
- स्वास्थ्य: मंत्री रहने के दौरान, उन्होंने मेडिकल और आयुष को बढ़ावा दिया। अस्पतालों और सेवाओं को सुधारा।
- इंदौर का विकास: उन्होंने सड़क, पानी, बिजली, और सफाई पर काम किया।
- शिक्षा और खेल: खुद खिलाड़ी होने के नाते, उन्होंने खेल को बढ़ावा दिया। युवाओं को дисципीन और खेल भावना सिखाई।
- संगठन: भाजपा को मजबूत करने में मदद की। बूथ तक काम किया।
मतदाता और चुनाव
इंदौर-5 पहले से भाजपा का गढ़ रहा है। लेकिन, हर बार कांग्रेस ने चुनौती दी।
- 2003 और 2008: बहुत बड़े अंतर से जीते।
- 2013: आराम से जीते।
- 2018: मुकाबला कठिन हुआ। कांग्रेस ने जोर दिया। फिर भी, हार्डिया जीते।
- 2023: वोटरों ने उन्हें फिर से चुना। उन्हें भरोसा दिखाया।
उनके वोट बैंक में व्यापारी, मिडिल क्लास, और परंपरागत भाजपा वोटर थे।
वाद-विवाद और आलोचना
- स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए, विपक्ष ने कुछ फैसलों पर सवाल किए।
- मेडिकल कॉलेज की सुविधाओं और डॉटर की हड़ताल को लेकर आलोचना हुई।
- आंशिक विकास, देरी और असमानता के आरोप लगे।
इन सब के बावजूद, उनकी छवि साफ-सुथरी बनी रही। वे समाज सेवा और खेलों में रुचि रखते हैं। युवाओं को खेलों को बढ़ावा देने के लिए कहते हैं। महेंद्र हार्डिया का जीवन दर्शाता है कि संघर्ष और जनता से जुड़ाव से लंबा करियर बनता है।
छात्र राजनीति से शुरुआत कर 5वीं बार विधायक बने। इन्होंने जनता का भरोसा जीता। विवाद आए, पर देखा जाए तो उनका अनुभव और जनता से जुड़ाव उन्हें मजबूत बनाता रहा। आज, वे सिर्फ इंदौर में नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश भाजपा में एक प्रमुख नेता हैं। जनता उनसे विकास और सेवा की उम्मीद रखती है।
