रिपोर्ट, काजल जाटव: मध्य प्रदेश की जनजातीय राजनीति में हाल के वर्षों में एक नया चेहरा तेजी से उभरा है — श्री कमलेश्वर डोडियार, जो सैलाना विधानसभा क्षेत्र (क्रमांक 221) से 2023 के चुनाव में पहली बार विधायक बने हैं। वे भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के प्रतिनिधि हैं — एक ऐसी पार्टी जो आदिवासी समाज के अधिकार, स्वाभिमान और विकास के मुद्दों को केंद्र में रखकर राजनीति कर रही है।

कमलेश्वर डोडियार का राजनीतिक उदय इस बात का प्रतीक है कि अब आदिवासी राजनीति पारंपरिक सीमाओं से निकलकर अपने स्वयं के नेतृत्व और विचारधारा की दिशा में बढ़ रही है।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

कमलेश्वर डोडियार का जन्म 9 सितंबर 1990 को रतलाम जिले के ग्राम राधाकुआ, तहसील सैलाना में हुआ। उनके पिता श्री भूरलाल डोडियार एक साधारण किसान थे जिन्होंने सीमित साधनों के बावजूद अपने बेटे को शिक्षा के प्रति समर्पित बनाया।

कमलेश्वर ने बी.ए. और एल.एल.बी. की डिग्री प्राप्त की — यानी वे एक शिक्षित, विधि-जानकार जनप्रतिनिधि हैं। अपने छात्र जीवन में वे समाजसेवा, वाद-विवाद और युवा मंचों में सक्रिय रहे। कानून की पढ़ाई ने उन्हें सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों की गहरी समझ दी।

पारिवारिक पृष्ठभूमि और व्यक्तिगत जीवन

कमलेश्वर डोडियार का जीवन सादगी और ग्रामीण संस्कृति से गहराई से जुड़ा है। वे कृषि और मजदूरी को अपना मूल व्यवसाय मानते हैं और अक्सर अपने खेतों में काम करते हुए देखे जाते हैं।

उनकी पत्नी श्रीमती अंजली डोडियार भी सामाजिक कार्यों में उनकी सहयोगी हैं। दोनों एक पुत्र के माता-पिता हैं। उनका परिवार आदिवासी मूल्यों, सरलता और सामूहिकता में विश्वास रखता है।

राजनीतिक सफर की शुरुआत

कमलेश्वर डोडियार का राजनीतिक सफर स्थानीय स्तर से शुरू हुआ। उन्होंने ग्राम पंचायत और ब्लॉक स्तर के आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। विशेष रूप से वनाधिकार, भूमि पट्टा वितरण, पेयजल, और आदिवासी युवाओं की शिक्षा जैसे मुद्दों पर वे लगातार आवाज उठाते रहे।

वे कई वर्षों तक आदिवासी छात्र संगठनों और सामाजिक जनआंदोलनों से जुड़े रहे। 2022 में उन्होंने “भारत आदिवासी पार्टी” (BAP) के मंच से सक्रिय राजनीति में कदम रखा।

इस पार्टी का मकसद था — “आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व आदिवासी स्वयं करें।”

2023 का विधानसभा चुनाव — जनमत की नई दिशा

2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में सैलाना सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय रहा — भाजपा, कांग्रेस और भारत आदिवासी पार्टी के बीच।

जहाँ परंपरागत रूप से यह सीट भाजपा और कांग्रेस के बीच घूमती रही थी, वहीं कमलेश्वर डोडियार ने इस इतिहास को तोड़ते हुए जनता की भावनाओं को अपने पक्ष में मोड़ा।

उनकी सादगी, युवावस्था और समाज के बीच निरंतर उपस्थिति ने उन्हें युवा और आदिवासी मतदाताओं का स्वाभाविक नेता बना दिया।

उन्होंने “हमारा नेता हमसे निकला है” जैसे नारों से प्रचार किया, जो आदिवासी समाज में गहराई तक उतरे।

परिणामस्वरूप, कमलेश्वर डोडियार ने लगभग 80,000 मतों से विजय प्राप्त की, जो सैलाना क्षेत्र में BAP की ऐतिहासिक जीत मानी गई।

विधायकी के पहले वर्ष के कार्य

विधायक बनने के बाद से कमलेश्वर डोडियार ने सैलाना क्षेत्र में जनसंपर्क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुधार को प्राथमिकता दी।

  1. शिक्षा के लिए पहल: उन्होंने ग्रामीण और आदिवासी बहुल इलाकों में स्कूलों के पुनः संचालन, छात्रावासों की सुविधा, और शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विधानसभा में आवाज उठाई।
  2. किसान और जल संकट: सैलाना क्षेत्र के किसानों की सिंचाई व्यवस्था सुधारने के लिए उन्होंने छोटे बाँधों और नहरों की मरम्मत योजनाएं शुरू कराईं।
  3. स्वास्थ्य सेवाएं: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों की कमी, डॉक्टरों की अनुपस्थिति और मातृ-स्वास्थ्य योजनाओं की खामियों पर लगातार प्रश्न उठाए।
  4. युवा सशक्तिकरण: उन्होंने “युवा संवाद यात्रा” चलाई — जिसमें बेरोजगारी, सरकारी भर्ती, और कौशल प्रशिक्षण पर युवाओं से सीधा संवाद किया गया।
  5. भ्रष्टाचार विरोध: डोडियार ने स्थानीय निकायों में भ्रष्टाचार की शिकायतों पर कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन को पत्र लिखा और कई मुद्दों को विधानसभा में उठाया।

विचारधारा और जनसंपर्क

कमलेश्वर डोडियार की राजनीति विकास और स्वाभिमान की राजनीति है। वे यह मानते हैं कि “आदिवासी समाज को केवल वोट बैंक नहीं, बल्कि नीति निर्माण का हिस्सा बनना चाहिए।”

वे डॉ. भीमराव अंबेडकर और बिरसा मुंडा के विचारों को अपना प्रेरणास्रोत मानते हैं। अपने भाषणों में वे अक्सर कहते हैं —

“हमें अपनी मिट्टी, जंगल और जल से जुड़कर विकास की परिभाषा खुद लिखनी होगी।”

वे सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहते हैं और अपने क्षेत्र की समस्याओं पर नियमित रूप से पोस्ट करते हैं।

जनता से जुड़ाव और लोकप्रियता

कमलेश्वर डोडियार को जनता का विधायक कहा जाता है। वे बिना प्रोटोकॉल के गाँवों में जाते हैं, लोगों के घरों में बैठकर बात करते हैं और व्यक्तिगत समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासनिक अधिकारियों से सीधे संवाद करते हैं।

उनकी यही सरलता और सहजता उन्हें पारंपरिक नेताओं से अलग बनाती है।

विवाद और चुनौतियाँ

हालाँकि उनका राजनीतिक जीवन अभी नया है, फिर भी कुछ स्थानीय स्तर पर विवाद उभरे हैं —

  • विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि BAP के कुछ कार्यकर्ताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान उत्तेजक भाषण दिए।
  • एक बार सोशल मीडिया पर एक प्रशासनिक निर्णय की आलोचना करने पर उन्हें “राज्य विरोधी” कहकर निशाना बनाया गया।
    हालाँकि उन्होंने इन आरोपों का शांतिपूर्ण जवाब देते हुए कहा —

“विपक्ष का काम आलोचना करना है, मेरा काम जनता की आवाज़ उठाना।”

अब तक उन पर किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार या व्यक्तिगत लाभ का आरोप नहीं लगा है।

भविष्य की दिशा

कमलेश्वर डोडियार अब सैलाना की राजनीति में एक युवा और दृढ़ चेहरा बन चुके हैं। वे विधानसभा में आदिवासी मुद्दों को तार्किक और अध्ययनशील तरीके से उठाते हैं।
उनका लक्ष्य है —

  • सैलाना को शिक्षा और स्वास्थ्य मॉडल क्षेत्र बनाना
  • आदिवासी युवाओं के लिए स्किल सेंटर स्थापित करना
  • कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन देना
  • वनभूमि और जलस्रोतों की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करना

कमलेश्वर डोडियार एक ऐसे जनप्रतिनिधि हैं जिनकी राजनीति भाषणों से नहीं, बल्कि ज़मीनी जुड़ाव से परिभाषित होती है।
वे उस नई पीढ़ी के आदिवासी नेताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं जो संघर्ष से निकले हैं, शिक्षित हैं, और समाज के लिए पारदर्शी राजनीति का सपना देखते हैं।

सैलाना की जनता के लिए वे सिर्फ विधायक नहीं, बल्कि अपनों में से एक हैं — जो यह विश्वास जगाते हैं कि राजनीति अब गाँव, जंगल और खेतों से उठी आवाज़ों की भी हो सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *