रिपोर्ट, काजल जाटव: मध्य प्रदेश की राजनीति में देवास सीट का अपना खास मतलब है। इस इलाक़े ने कई बार शाही परिवारों और उनके उत्तराधिकारियों को मौका दिया है। इनमें से एक नाम है श्रीमती गायत्री राजे पवार, जो देवास के वंश से हैं और बीजेपी की काफी सक्रिय नेता हैं। वह तीन बार लगातार विधायक चुनी जा चुकी हैं और राज्य की राजनीति में मजबूत पहचान बना चुकी हैं।
प्रारंभिक जीवन और पढ़ाई
गायत्री राजे पवार का जन्म 27 मार्च 1965 को ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में हुआ। उनके पिता श्री एस.के. महाडिक एक सम्मानित शख्सियत थे। उन्होंने साइंस से बी.एस.सी. किया। छोटी उम्र से ही वे पढ़ने-लिखने और समाज में भाग लेने का शौक रखती थीं। पढ़ाई और सोशल एक्टिविटी में उनकी रुचि ने उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया।
शादी के बाद वे देवास के राजपरिवार का हिस्सा बनीं। उनके पति स्व. श्री तुकोजीराव पवार लंबे समय तक देवास के जनता के लिए काम करने वाले नेता रहे। पति की जल्दी मौत के बाद, गायत्री राजे ने उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का ठाना।
राजनीतिक सफर
गायत्री राजे पवार का राजनीतिक सफर 2015 से शुरू होता है। उनके पति की मौत के बाद देवास सीट खाली हुई। बीजेपी ने उन्हें उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया।
- 2015 उपचुनाव: जनता ने उन्हें भारी समर्थन देकर चौदहवीं विधानसभा का सदस्य चुना। 7 दिसंबर 2015 को उन्होंने विधायक की शपथ ली।
- 2018 विधानसभा चुनाव: फिर जनता ने उन पर भरोसा जताया और दूसरी बार विधायक बनीं।
- 2023 विधानसभा चुनाव: लगातार तीसरी बार उन्होंने जनता का दिल जीता, ये उनकी लोकप्रियता का प्रमाण है।
कामकाज और योगदान
गायत्री राजे पवार ने अपने कार्यकाल में देवास की तरक्की के लिए कई योजनाएं शुरू कीं। उनके मुख्य फोकस हमेशा कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण रहे।
- किसानों के लिए सिंचाई और बीज-उर्वरक की समस्या को हल करने की कोशिश की।
- देवास शहर में सड़क, पेयजल और सफाई व्यवस्था को सुधारने के लिए योजनाएं शुरू कीं।
- ग्रामीण जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को बेहतर बनाया।
- महिला समूहों और स्व सहायता समितियों के जरिए रोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया।
उनका शाही परिवार से जुड़ा होना उन्हें जनता से दूर नहीं रखता। वे आम लोगों के बीच जाती हैं और उनकी बातें सुनकर उनके मसले हल करने का प्रयास करती हैं।
जनता से जुड़ाव और वोटों का भाव
देवास इलाके में गायत्री राजे का असर इसलिए भी मजबूत है क्योंकि लोग उन्हें अपने ही जैसे समझते हैं। उनका मिलनसार अंदाज और आसानी से मिल जाना उन्हें वोटरों के करीब बनाए रखता है। चुनावों में वो अक्सर दोनों शहरों और गावों में से समर्थन पाती हैं।
- 2015 में हुए उपचुनाव में उन्होंने भारी अंतर से जीत हासिल की।
- 2018 और 2023 में भी, भाजपा की टीम और उनके कार्यकर्ताओं की एकजुटता और उनकी अपनी लोकप्रियता ने जीत का रास्ता आसान कर दिया।
विवाद जाएं और आलोचनाएँ
हर राजनेता की तरह, गायत्री राजे का जीवन भी विवादों से अछूता नहीं रहा है।
- वंशवाद का आरोप – विपक्ष उनकी राजनीति पर यह कहते रहे हैं कि देवास की जनता पर राजघराने का प्रभाव है और उन्हें राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाया गया है।
- विकास की धीमी गति – कुछ लोगों ने कहा कि, ऐसे शहर में जहां उद्योग और इतिहास दोनों प्रमुख हैं, वहां सुधार भी धीमा है।
- पार्टी में खिंचाव – भाजपा के अंदर कभी-कभी परस्पर गुटबाजी और मतभेद की खबरें आती हैं, जो उनके कामकाज को प्रभावित करती हैं।
हालांकि इन बातों के बावजूद, उनकी जनता से सीधे जुड़ाव और लोकप्रियता रहें, जो उन्हें बार-बार सफलता दिलाती है।
भविष्य की संभावनाएं
गायत्री राजे का यह राजनीतिक सफर दिखाता है कि कैसे एक राजघराने से आई महिला जनता की बात समझ कर राजनीति कर सकती है। अपने पति की विरासत संभालते हुए उन्होंने भाजपा को मजबूत किया और देवास के विकास में भी हाथ बंटाया। यह उनकी मेहनत, जनता से जुड़ाव और संगठन की मजबूती का भी फल है।
