रिपोर्ट, काजल जाटव: भारतीय राजनीति में अनेक ऐसे जनप्रतिनिधि हैं जिन्होंने समाजसेवा को अपना मूल उद्देश्य बनाकर कार्य किया और धीरे-धीरे राजनीति की मुख्यधारा तक पहुँचे। ऐसे ही नेताओं में डॉ. तेजबहादुर सिंह चौहान का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। नागदा-खाचरोद (212) विधानसभा क्षेत्र से 2023 में पहली बार विधायक निर्वाचित हुए डॉ. चौहान ने अपने लंबे समाजसेवी अनुभव और जनता के बीच सक्रियता के बल पर यह मुकाम हासिल किया।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
डॉ. तेजबहादुर सिंह चौहान का जन्म 2 नवंबर 1967 को उज्जैन जिले की महिदपुर तहसील के ग्राम राघवी में हुआ। उनके पिता श्री नौबत सिंह चौहान एक सामान्य किसान परिवार से थे। बचपन से ही उन्हें शिक्षा और समाजसेवा के संस्कार मिले। उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र को अपना करियर चुना और डी.एच.एम.एस. (होम्योपैथिक मेडिकल डिग्री) प्राप्त की।
शिक्षा पूरी करने के बाद वे एक सफल चिकित्सक के रूप में स्थापित हुए। इलाज के साथ-साथ वे ग्रामीण और शहरी गरीब तबके की सेवा में हमेशा आगे रहे। इसी कारण स्थानीय स्तर पर वे एक संवेदनशील डॉक्टर और समाजसेवी के रूप में लोकप्रिय हुए।
परिवारिक जीवन
डॉ. चौहान का वैवाहिक जीवन भी सफल और संतुलित रहा है। उनकी पत्नी श्रीमती रेखा कुंवर एक गृहिणी हैं, जो सामाजिक कार्यों में भी सहयोग देती हैं। उनके दो पुत्र और एक पुत्री हैं। परिवारिक पृष्ठभूमि सादगी और परंपरागत मूल्यों से जुड़ी है, जिसने उन्हें राजनीति में भी सरल और सहज बनाए रखा है।
समाजसेवा और राजनीतिक जीवन की शुरुआत
चिकित्सा सेवा के दौरान ही डॉ. चौहान ने समाज के विभिन्न वर्गों की समस्याओं को नजदीक से देखा। बेरोजगारी, शिक्षा की कमी, स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव और ग्रामीण क्षेत्रों की दिक्कतों ने उन्हें राजनीति की ओर प्रेरित किया।
सन 2000 से 2004 तक वे भारतीय जनता पार्टी से नागदा नगर पालिका में पार्षद निर्वाचित हुए। इस पद पर रहते हुए उन्होंने स्थानीय स्तर पर कई विकास कार्य कराए, जैसे—
- मोहल्लों में पेयजल आपूर्ति में सुधार।
- स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन।
- गरीब और जरूरतमंदों के लिए आवास व सहायता योजनाओं का संचालन।
यही सक्रियता आगे चलकर उनकी राजनीतिक पहचान की नींव बनी।
विधायक के रूप में सफर
सन् 2023 में पहली बार वे नागदा-खाचरोद विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे। जनता से गहरे जुड़ाव और लंबे समय से क्षेत्र में सक्रियता के कारण उन्होंने चुनाव में जीत दर्ज की।
उनकी जीत के पीछे मुख्य कारण थे:
- स्थानीय स्तर पर डॉक्टर और समाजसेवी की पहचान।
- भाजपा संगठन में कार्यकर्ताओं का मजबूत नेटवर्क।
- जनता से सीधा संपर्क और आम लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता देना।
विधानसभा पहुँचने के बाद से वे स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
कार्य और उपलब्धियाँ
- स्वास्थ्य क्षेत्र: विधायक बनने के बाद उन्होंने विधानसभा क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सुदृढ़ करने और दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास किए।
- शिक्षा: ग्रामीण विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं को बेहतर करने की पहल की।
- सड़क और पेयजल: उन्होंने विधानसभा में कई बार क्षेत्र की सड़क और पेयजल समस्या को उठाया और बजट आवंटन में सहयोग सुनिश्चित किया।
- युवा और खेल: स्वयं खेलों में रुचि रखने के कारण वे युवाओं को खेल गतिविधियों में प्रोत्साहित करते हैं और स्थानीय स्तर पर खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन कराते हैं।
वोटिंग पैटर्न और जनता से जुड़ाव
डॉ. चौहान अपने विधानसभा क्षेत्र में जनता के बीच निरंतर सक्रिय रहते हैं। उनकी बैठकों और जनसंपर्क अभियानों में बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं। मतदान प्रतिशत की बात करें तो 2023 के विधानसभा चुनाव में नागदा-खाचरोद सीट पर लगभग 75% से अधिक मतदान हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण और शहरी मतदाता शामिल थे। डॉ. चौहान ने इस चुनाव में निर्णायक बढ़त से जीत हासिल की।
विवाद और चुनौतियाँ
हालाँकि डॉ. चौहान की छवि साफ-सुथरी और समाजसेवी रही है, फिर भी राजनीति में रहते हुए विवादों से पूरी तरह दूर रहना कठिन होता है। उनके राजनीतिक जीवन से जुड़े कुछ चर्चित बिंदु रहे:
- कुछ विपक्षी नेताओं ने उन पर आरोप लगाया कि वे विधायक बनने के बाद पार्टी लाइन पर अधिक सक्रिय हैं और जनता की समस्याओं पर उतना ध्यान नहीं देते जितना चुनाव से पहले दिया करते थे।
- नगर निगम स्तर पर कुछ विकास कार्यों में देरी को लेकर स्थानीय स्तर पर असंतोष सामने आया।
- विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि उनके प्रयासों से कुछ योजनाएँ केवल भाजपा समर्थकों तक ही सीमित रहीं।
हालाँकि इन विवादों पर उन्होंने हमेशा स्पष्ट कहा कि वे सभी वर्गों की सेवा के लिए राजनीति में आए हैं और निरंतर जनता के साथ खड़े हैं।
डॉ. तेजबहादुर सिंह चौहान का जीवन संघर्ष, सेवा और समर्पण का उदाहरण है। एक चिकित्सक के रूप में उन्होंने सेवा की शुरुआत की और फिर समाजसेवा से राजनीति तक का सफर तय किया। 2023 में पहली बार विधायक बनने के बाद वे अभी अपने क्षेत्र के विकास की दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। हालाँकि राजनीति की चुनौतियाँ और विवाद उनसे भी अछूते नहीं रहे, लेकिन उनकी साफ-सुथरी छवि और जनता से निकटता उन्हें एक भरोसेमंद नेता के रूप में स्थापित करती है।
