रिपोर्ट, काजल जाटव: भारतीय राजनीति में बहुत से ऐसे नेता हैं जिन्होंने समाज की भलाई के काम और अपने संगठनात्मक जिम्मेदारियों के जरिए अपनी पहचान बनाई है। मध्य प्रदेश में डॉ. राजेश सोनकर का नाम भी ऐसा ही एक नाम है। इंदौर से गहरे जुड़े होने और लंबे राजनीतिक अनुभव के कारण, वे केवल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लोकप्रिय नेता ही नहीं हैं, बल्कि एससी समुदाय में भी एक प्रमुख पहचान बन चुके हैं।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

डॉ. राजेश सोनकर का जन्म ९ दिसंबर 1968 को इंदौर में हुआ था। उनके पिता श्री नानकचंद सोनकर साधारण पृष्ठभूमि से थे, मगर घर की संस्कारियों ने उन्हें शिक्षा और समाजसेवा की ओर प्रेरित किया। वे पढ़ाई के क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल कर चुके हैं।

  • एम.ए.
  • एल.एल.बी.
  • पी.एच.डी.

इन शैक्षणिक योग्यता के चलते डॉ. सोनकर ना सिर्फ राजनीति, बल्कि कानून और शिक्षा में भी अच्छी पकड़ रखने वाले नेता हैं।

राजनीति में शुरुआत

राजनीति में कदम रखने से पहले वे सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों में भी सक्रिय रहे। उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के जरिए अपने करियर की शुरुआत की और प्रदेश उपाध्यक्ष बने। बाद में, भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा में भी वे प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर रहे।

उनकी पहचान संगठन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजक के रूप में भी है। उन्होंने ‘समस्त सांस्कृतिक दर्शन संस्था’ का नेतृत्व किया और ‘विदेशी खेल कुंभ’ और ‘विमर्श’ जैसे आयोजनों से समाज में अपनी सक्रियता दिखाई।

विधायक के तौर पर योगदान

2013 में, उन्होंने पहली बार इंदौर की सांवर (SC) विधानसभा सीट से जीत हासिल की। यह भाजपा के लिए बहुत महत्वपूर्ण जीत थी क्योंकि इस सीट पर जंग अक्सर कड़ी रहती है।

2023 में, वे फिर से जनता का समर्थन पाकर विधानसभा पहुंचे। लगातार दो बार जीत हासिल करने से ये साबित होता है कि इंदौर और उसके आस-पास के इलाके में उनकी पकड़ मजबूत है।

कामकाजी दायित्व और उपलब्धियां

  • एससी वर्ग का उत्थान – डॉ. सोनकर ने हमेशा एससी समुदाय के अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए आवाज उठाई है।
  • खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रम – उन्होंने कई बार खेल प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर युवा वर्ग को जोड़ा है।
  • विधानसभा में सक्रियता – वे सदन में स्थानीय मुद्दों को उठाने और सरकार की योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाने में लगे रहते हैं।
  • जनसंपर्क और विकास – सड़कों, शिक्षा संस्थानों और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए लगातार काम करते हैं।

मतदाता और राजनीतिक प्रभाव

डॉ. सोनकर का मुख्य वोटर बेस एससी समुदाय है, लेकिन उन्होंने इंदौर के अन्य वर्गों में भी अपनी पहचान बनाई है। भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में उनकी मजबूत पकड़ और स्थानीय नेताओं के साथ घनिष्ठता ने उनकी दोबारा जीत सुनिश्चित की।

उनकी जीत इस बात का भी उदाहरण है कि वे जमीन से जुड़े नेता के रूप में जनता में स्वीकार्य हैं।

विकास और आलोचनाएँ 

  1. राजनीति का हिस्सा हैं, और डॉ. राजेश सोनकर इससे अलग नहीं हैं। उन्होंने भी कई बार सुर्खियाँ बटोरी हैं। 
  2. टिकट वितरण और भाजपा में अंदरूनी खींचतान को लेकर 2020 सांवेर उपचुनाव के दौरान उनके नाम पर खूब चर्चा हुई।
  3. विपक्ष अक्सर आरोप लगाता है कि वे ज्यादा संगठनात्मक राजनीति में ही ध्यान केंद्रित करते हैं, बजाय विकास के। कुछ बार उनके बोलने का तरीका भी विवाद की वजह बना, लेकिन वे इसे राजनीति का हिस्सा मानते हैं।

राजनीतिक छवि

डॉ. सोनकर को भाजपा में न सिर्फ मेहनती और ऊर्जावान नेता कहा जाता है, बल्कि उनका सरल स्वभाव, संगठित होने का जज्बा और समाजसेवा का अनुभव उन्हें अलग पहचान देता है। विशेष तौर पर, वे अनुसूचित जाति समुदायों के मुद्दों पर बहुत सक्रिय रहते हैं। 

आज के समय में, उनका राजनीतिक सफर इस बात का सबूत है कि लगातार मेहनत और सक्रिय रहकर राजनीति में जगह बन सकती है। 2013 से लेकर अब तक, वे जनता के बीच अपनी मजबूत जगह बनाए हुए हैं।

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