रिपोर्ट, काजल जाटव: मध्य प्रदेश की राजनीति में डॉ. कुँवर विजय शाह का नाम एक लंबा और मजबूत राजनीतिक करियर के साथ जुड़ा हुआ है। हरसूद विधानसभा से वो आठ बार विधायक चुने जाने का रिकॉर्ड कायम करके अपनी पॉपुलैरिटी और जनता का भरोसा दिखाते हैं। वे भारतीय जनता पार्टी के अपने वरिष्ठ नेता हैं और अभी के समय में वे जनजातीय कार्य, लोक संपर्क, भोपाल गैस त्रासदी राहत और पुनर्वास जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
शुरुआती जीवन और पढ़ाई
डॉ. कुँवर विजय शाह का जन्म 1 नवंबर, 1962 को हरदा जिले के मकड़ाई गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम स्वर्गीय श्री देवी शाह था। आम परिवार से आने वाले शाह ने अपनी शिक्षा में भी अच्छा प्रदर्शन किया। उन्होंने एम.ए. (इतिहास) की डिग्री हासिल की और पढ़ाई के सालों में ही छात्र राजनीति में भी शामिल होकर नेतृत्व का अनुभव प्राप्त किया।
छात्र राजनीति से राजनीति तक
की राजनीति तक शाह का जज्बा छात्र जीवन में ही शुरू हो गया था। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के साथ काम किया और इंदौर में कॉलेज चुनावों में सक्रिय रहे। छात्र राजनीति ने उन्हें सीधे जनता से बात करने और संगठन चलाने का अच्छा अनुभव दिया।
राजनीतिक करियर और लगातार जीत
डॉ. शाह का राजनीतिक सफर 1990 के विधानसभा चुनाव से शुरू हुआ, जब पहली बार वह हरसूद से विधायक चुने गए। उसके बाद तो उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
- 1990, 1993, और 1998 में लगातार तीन बार विधायक चुने गए। इस दौर में उन्होंने विधानसभा की अलग-अलग समितियों में काम किया।
- 2003 में चौथी बार जीत हासिल कर वह मंत्री बने और संस्कृति, पर्यटन, आदिवासी कल्याण, वन विभाग, उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा जैसी विभागों के जिम्मे रहे।
- 2008 और 2013 में भी लगातार जीत हासिल कर वह मंत्री बने और खाद्य, नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता संरक्षण और स्कूल शिक्षा जैसे विभाग संभाले।
- 2018 में फिर से जीत हासिल कर वह सातवीं बार विधायक चुने गए। – 2 जुलाई 2020 को मंत्री पद की शपथ ली और वन विभाग की जिम्मेदारी मिली।
- 2023 में फिर से हरसूद से जीत दर्ज करके अपना दमखम दिखाया। आज वे राज्य सरकार में जनजातीय कार्य, लोक संपर्क और भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास जैसे अहम मंत्रालय संभाल रहे हैं।
जनता का समर्थन और वोट
डॉ. शाह की लगातार जीत का सबसे बड़ा कारण उनका जनता से सीधे जुड़ाव और क्षेत्र में विकास कार्य हैं। वह न सिर्फ आदिवासी समुदाय में बहुत लोकप्रिय हैं, बल्कि किसान और युवा वर्ग में भी मजबूत पकड़ रखते हैं। हरसूद जैसे इलाके में, जहां अधिकतर आदिवासी और ग्रामीण लोग रहते हैं, उन्होंने सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और सिंचाई जैसे जरूरी मुद्दों पर काम किया है। इसी कारण विपक्ष ने कई बार मजबूत उम्मीदवार उतारे, पर जनता ने बार-बार उन्हें ही चुना।
मंत्री पद पर कार्य
डॉ. शाह ने अपने लंबे करियर में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली और कई योजनाएँ लागू कीं:
- आदिवासी कल्याण विभाग में रहते हुए उन्होंने शिक्षा और छात्रवृत्ति योजनाओं को मजबूत किया।
- पर्यटन मंत्री के रूप में उन्होंने मध्य प्रदेश को पर्यटन मानचित्र पर और सशक्त बनाने की कोशिश की।
- स्कूल शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने शैक्षिक संसाधनों और अधोसंरचना को बढ़ाने की दिशा में कार्य किया।
- वन मंत्री रहते हुए वनों के संरक्षण और वनवासियों के अधिकारों पर विशेष ध्यान दिया।
- वर्तमान में वे जनजातीय कार्य और लोक संपर्क विभाग के तहत योजनाओं को ज़मीनी स्तर पर पहुँचाने पर काम कर रहे हैं।
विवाद और आलोचनाएँ
लंबे राजनीतिक जीवन में डॉ. शाह विवादों से भी अछूते नहीं रहे हैं।
- उन पर कई बार वन विभाग में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगे। विपक्ष ने उन्हें ठेकेदारों और माफियाओं से करीबी रखने का आरोप लगाया।
- जनसंपर्क विभाग के मंत्री रहते हुए मीडिया प्रबंधन और विज्ञापन खर्च को लेकर भी सवाल उठे।
- विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद हरसूद क्षेत्र की बुनियादी समस्याएँ पूरी तरह हल नहीं हुईं।
हालाँकि, शाह ने हर बार इन आरोपों का जवाब अपनी कार्यशैली और जनता से सीधा संवाद करके दिया। उनकी लोकप्रियता से यह साबित होता है कि विवादों का असर उनकी छवि पर अपेक्षित रूप से नहीं पड़ा।
डॉ. कुँवर विजय शाह मध्य प्रदेश के उन नेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने चार दशक तक राजनीति में सक्रिय रहकर निरंतर जनादेश प्राप्त किया। हरसूद क्षेत्र में उनकी लगातार आठ जीत इस बात का प्रमाण है कि जनता ने उन्हें हमेशा अपना विश्वास सौंपा। शिक्षा, समाजसेवा और राजनीतिक अनुभव से समृद्ध शाह आज राज्य सरकार के महत्वपूर्ण मंत्री हैं और आदिवासी समाज सहित व्यापक वर्गों की आवाज़ विधानसभा और सरकार तक पहुँचाते हैं।
