Muskan Garg: फिल्म जगत में राजामौली का नाम ही काफी है, और उन्होंने अपनी पहले की किसी भी फिल्म से बढ़कर कुछ करने का इरादा किया हुआ है। रिलीज से पहले ही, उनकी अगली फिल्म वाराणसी ने बजट, प्रोजेक्ट की स्केल और प्री-सैल्स की दृष्टि से “भारत की अब तक की सबसे बड़ी फिल्म” बनने का दावा किया है।
जब बजट बन जाए रिकॉर्ड हज़ार करोड़ से भी आगे:
वाराणसी का बजट इतना ज्यादा है कि अनुमान लगाया जा रहा है कि यह ₹ 1,300 करोड़ तक पहुंच सकती है। इतना ही नहीं डिजिटल राइट्स (OTT), म्यूजिक-राइट्स व अन्य बेचानियों को मिलाकर, फिल्म की कमाई रिलीज से पहले ही करोड़ों में तय हो चुकी है। माना जा रहा है कि सिर्फ़ स्ट्रीमिंग राइट्स ही लगभग ₹ 1,000 करोड़ तक बिक सकते हैं। अगर ऐसा हुआ, तो यह किसी भारतीय फिल्म के लिए पहले कभी नहीं हुआ होगा।
भव्यता, स्केल और विश्व-दृष्टि राजामौली फिर अपनी छाप छोड़ने को तैयार:
बाहुबली और आर. आर. आर जैसे पिछले फिल्मों ने दिखाया है कि राजामौली सिर्फ बड़े बजट के नहीं बल्कि बड़े विजन के निर्देशक हैं। अब वाराणसी फिल्म भी ऐसी कोशिश कर रही है, कहानी, सेट-डिज़ाइन, विज़ुअल इफ़ेक्ट्स और तकनीकी परिपक्वता सब कुछ इस तरह डिजाइन किया गया है, कि यह सिर्फ एक फिल्म न रहकर, एक “वैश्विक सिनेमाई अनुभव” बने।
शुरुआती झलक टीज़र ने बढ़ा दी लोगो की उम्मीदें:
हाल ही में जारी हुआ वाराणसी का टीज़र जिसमें अभिनेता महेश बाबू का अवतार सामने आया था उससे दर्शकों में उत्साह फैल गया है। टीज़र की रेस्पॉन्स से साफ है कि फिल्म की भव्यता, ग्राफिक्स और कहानी-दायरा सबकुछ बेहद शानदार है। फैंस सोशल मीडिया पर रोमांचित हैं और फिल्म को “इंडियन सिनेमा का अगला महाकाव्य” कह रहे हैं।
क्या है इस कदम की अहमियत क्यों है ये फिल्म इतनी खास?
अगर वाराणसी इस बजट और स्केल पर सफल रही, तो भारतीय फिल्मों के लिए नए मानक तय हों जायेंगे बड़े बजट, ग्लोबल स्केल और उच्च तकनीकी स्तर की बानगी बनेगी। यह साबित करेगा कि भारतीय फिल्म सिर्फ लोकल-कहानी या क्षेत्रीय फिल्मों तक सीमित नहीं है अब इसकी पहुँच विश्व-पटल तक जाएगी। साथ में, यह दर्शाएगा कि भारतीय सिनेमा में कलाकार, निर्देशन, VFX-टीम और फाइनेंस सब कुछ मिलकर एक बड़े गोल की ओर जा सकते हैं।
एक नई शुरुआत की ओर भारत का गौरव बढ़ाने वाली फिल्म:
राजमौली ने पहले भी साबित किया है कि ‘अगर देखा जाए, तो बनाया जाए’ और वाराणसी उसी सोच का अगला पड़ाव है। फिल्म अभी रिलीज़ नहीं हुई है, लेकिन उसकी तैयारी, बजट, व रुझान इतना बड़ा है कि इसे भारतीय सिनेमा की “नेक्स्ट जेनरेशन महाकाव्य” कहा जा रहा है। अगर सब ठीक रहा तो कहानी से लेकर बॉक्स-ऑफिस तक वाराणसी सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक इतिहास बनेगी।
