गीता राय: मध्यप्रदेश के भोपाल में 4 जुलाई को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा एक महत्वपूर्ण जनसुनवाई आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य मध्यप्रदेश की 32 पिछड़ी जातियों को केंद्रीय पिछड़ा वर्ग सूची में शामिल करने से संबंधित मांगों पर विचार करना था। यह जनसुनवाई भोपाल में आयोग अध्यक्ष हंसराज गंगाराम अहीर और सदस्य भुवन भूषण कमल की उपस्थिति में संपन्न हुई। इस अवसर पर राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमारिया और सदस्य सीताराम यादव भी उपस्थित रहे।
जनसुनवाई में विभिन्न जातियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अपनी जातियों की सामाजिक, आर्थिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि आयोग के समक्ष प्रस्तुत की। प्रतिनिधियों ने बताया कि भले ही उनकी जातियां राज्य की पिछड़ा वर्ग सूची में शामिल हैं, लेकिन केंद्रीय सूची में नाम न होने के कारण वे राष्ट्रीय स्तर पर आरक्षण, शिक्षा एवं नौकरियों में मिलने वाले लाभों से वंचित हैं।
केंद्रीय सूची में शामिल होंगी ये जातियां
जिन जातियों को केंद्रीय सूची में शामिल करने की सिफारिश की जा रही है उनमें दवेज, भोपा मनभाव, दमामी, हरिदास, कलार, जायसवाल, डउसेना, लोढ़ा (तंवर), गोलान, जादम, कुडमी, रूआला, रूहेला, अब्बासी, सक्का, घोषी, गवली, गोली, लिंगायत, महाकुल (राउत), थारवार, जमना लोधी, कोल्हाटी, झारिया, वोवरिया, मोवार, रजवार, सुत सारथी, तेलंगा, तिलंगा, गयार कौशल, वया थोरिया, खरादी, कमलीगर, संतराम, और शेख मेहतर शामिल हैं।
प्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि इन जातियों की सामाजिक स्थिति आर्थिक और शैक्षणिक रूप से कमजोर है। कई वर्षों से वे केंद्रीय सूची में शामिल होने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ। आयोग ने जनसुनवाई में प्रस्तुत दस्तावेजों और तथ्यों को गंभीरता से संज्ञान में लिया है और आश्वासन दिया कि संबंधित जातियों की मांगों की निष्पक्ष समीक्षा की जाएगी।
अब यह देखना अहम होगा कि क्या यह प्रयास केंद्र सरकार तक पहुंच कर जल्द ही सकारात्मक परिणाम लाएगा और इन जातियों को उनके हक का लाभ मिल सकेगा।
