कामना कासोटिया, भोपाल। मध्य प्रदेश में 13 हजार पदों के लिए हो रही प्राथमिक शिक्षक भर्ती फिर एक बार विवादों में घिर गई है। कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) द्वारा जारी किए गए नए नियमों और बदले हुए सिलेबस की वजह से हजारों अभ्यर्थी अयोग्य हो गए हैं। आवेदन की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही नियम बदलने और सिलेबस में किए गए बदलावों को लेकर छात्र काफी नाराज हैं।

क्या है मामला?

ईएसबी ने प्राथमिक शिक्षक वर्ग-3 के लिए भर्ती परीक्षा का नोटिफिकेशन जारी किया है लेकिन इस बार परीक्षा के नियमों और सिलेबस में अहम बदलाव कर दिए गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब आवेदन के लिए डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (D.El.Ed) का परिणाम अनिवार्य कर दिया गया है। यदि किसी अभ्यर्थी का डिप्लोमा का अंतिम परिणाम नहीं आया है तो वह आवेदन नहीं कर सकता।

पिछली भर्तियों में ऐसा कोई नियम नहीं था। उस समय अंतिम वर्ष में पढ़ रहे छात्र भी आवेदन कर सकते थे। इससे हजारों छात्र इस बार आवेदन नहीं कर पाएंगे, क्योंकि उनके डिप्लोमा का परिणाम अभी तक जारी नहीं हुआ है। भाषा विषय से संस्कृत और उर्दू हटेभाषा विषय में भी बड़ा बदलाव किया गया है। इस बार संस्कृत और उर्दू को वैकल्पिक भाषाओं की सूची से हटा दिया गया है। अब भाषा के रूप में केवल हिंदी, अंग्रेजी और मराठी को ही विकल्प रखा गया है। इससे संस्कृत और उर्दू विषय से तैयारी कर रहे हजारों छात्रों को बड़ा झटका लगा है।

2022 में हुई पिछली शिक्षक भर्ती परीक्षा में संस्कृत और उर्दू दोनों विकल्प उपलब्ध थे, लेकिन इस बार इन्हें सिलेबस से हटा देना अभ्यर्थियों के लिए चौंकाने वाला फैसला रहा।अभ्यर्थियों की नाराजगी: बोले – यह अन्याय हैनियमों और सिलेबस में इस तरह के बदलाव से अभ्यर्थी बेहद नाराज हैं। उनका कहना है कि तैयारी के दौरान पुराने सिलेबस को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कोचिंग, किताबें और विषय चुने थे। अब अचानक से बदलाव करके उन्हें आवेदन से वंचित करना सरासर अन्याय है।कई छात्रों ने कहा कि डिप्लोमा कोर्स का रिजल्ट देरी से आना आम बात है, लेकिन पहले इस वजह से आवेदन पर रोक नहीं लगती थी।

छात्रों ने की ये मांग

अब अचानक से नियम लागू करना हजारों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ है। कुछ छात्रों ने यह भी मांग की कि जब तक सभी संस्थानों के डिप्लोमा के रिजल्ट नहीं आ जाते, तब तक आवेदन की अंतिम तिथि को आगे बढ़ाया जाए। वहीं, कई छात्रों ने संस्कृत और उर्दू को फिर से विकल्प में शामिल करने की मांग की है।डिग्री पूरी होने की शर्त भी विवादितईएसबी ने यह शर्त भी जोड़ी है कि आवेदन वही कर पाएंगे जिनकी डिग्री पूरी हो चुकी हो।

इस नियम की वजह से वो छात्र भी बाहर हो गए हैं जो डिग्री के अंतिम वर्ष में हैं या जिनकी परीक्षा हो चुकी है लेकिन परिणाम आना बाकी है। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब परीक्षा अभी कुछ महीनों बाद होनी है, तो अभी से डिग्री पूरी होने की शर्त लगाना गैर जरूरी है। छात्रों को तैयारी और आवेदन का समान अवसर मिलना चाहिए।छात्रों की मांगडिप्लोमा अंतिम वर्ष के छात्रों को आवेदन की अनुमति दी जाए।संस्कृत और उर्दू विषय को पुनः विकल्प में जोड़ा जाए।

आवेदन की अंतिम तिथि को बढ़ाया जाए जब तक सभी का रिजल्ट न आ जाए। सिलेबस में बदलाव अगले साल से लागू किया जाए, इस बार पुराना सिलेबस ही मान्य हो। शिक्षक भर्ती जैसे महत्वपूर्ण मामले में बार-बार नियम बदलने से छात्रों में भारी असंतोष है।

यह कोई छोटी प्रक्रिया नहीं होती, इसमें छात्र सालों तक मेहनत करते हैं। ऐसे में आवेदन से ठीक पहले नियम और सिलेबस बदलना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ माना जा रहा है।सरकार और ईएसबी को चाहिए कि छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करे और कोई ऐसा रास्ता निकाले जिससे योग्य अभ्यर्थी आवेदन करने से वंचित न हों। शिक्षक भर्ती का उद्देश्य योग्य और समर्पित शिक्षकों का चयन करना होना चाहिए, न कि तकनीकी अड़चनों से उन्हें बाहर करना।

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