Muskan Garg: मध्य प्रदेश के सतना और जबलपुर स्थित सरकारी अस्पतालों में थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को संभवतः दूषित रक्त चढ़ाए जाने से कम से कम छह बच्चे HIV पॉजिटिव पाए गए हैं, जिससे प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

क्या हुआ? कैसे सामने आया यह मामला?
इन बच्चों की उम्र लगभग 12 से 15 वर्ष के बीच बताई जा रही है। वह थैलेसीमिया जैसी गंभीर ब्लड डिसऑर्डर से जूझ रहे थे और नियमित रूप से रक्त चढ़ाने की प्रक्रिया से गुजर रहे थे। चिकित्सीय जांच में देखा गया कि उन्हें HIV संक्रमण हो गया है, जो संभवतः दूषित रक्त चढ़ाए जाने की वजह से हुआ है। कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि इस संदर्भ में पहली पुष्टि मार्च 2025 में एक बच्चे के HIV पॉजिटिव पाए जाने के बाद मिली थी, लेकिन अब तक पूरे मामले का खुलासा आज सामने आया है।

सरकार की प्रतिक्रिया: जांच समिति का गठन:
प्रदेश सरकार ने इस गंभीर मामले को लेकर तत्काल छह सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर दी है। इस कमेटी को सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि कहीं कहीं भी खून की जाँच प्रोटोकॉल में लापरवाही हुई थी या रक्त बैंक के संचालन में कोई गंभीर चूक हुई है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी मामले की गंभीरता पर तत्काल संज्ञान लिया है और स्वास्थ्य मंत्री से उच्च स्तरीय जांच करवाने के आदेश जारी कर दिए हैं। विपक्षी दलों ने भी इस लापरवाही को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है और जवाबदेही तय करने की मांग की है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर प्रश्न:
यह मामला केवल एक प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि राज्य के स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल है। रक्त चढ़ाने जैसी सामान्य चिकित्सा प्रक्रिया में सुरक्षा मानकों का पालन न होने से बच्चों को AIDS जैसी जानलेवा बीमारी का संक्रमण हो गया यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।

अब सबकी निगाह इस जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे साफ़ पता चल सके कि कहाँ चूक हुई है, और भविष्य में ऐसे भयावह मामलों को कैसे रोका जा सकता है। इस घटना ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की मजबूती और निगरानी की अत्यधिक आवश्यकता को फिर से उजागर कर दिया है।

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