Muskan Garg: मध्य प्रदेश में सरकारी अस्पतालों की साफ़-सफाई और सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंता उठ खड़ी हुई है। जबलपुर के विक्टोरिया जिला अस्पताल के हड्डी/अर्थोपेडिक्स वार्ड और आईसीयू में चूहों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें चूहे मरीजों के बेड, टिफिन और तकियों के आसपास घूमते दिखाई दे रहे हैं, यह हादसा स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही की झलक दिखाता है।
वीडियो-सबूत: क्या दिखा जबलपुर के विक्टोरिया हॉस्पिटल में?
वायरल फुटेज में कमरों में कम से कम 3-4 चूहे बेख़ौफ़ घूमते नज़र आए कुछ तो मरीजों के बिस्तर पर चढ़ते और टिफिन खोलते भी दिखे। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर उत्तरदायित्व का आरोप लगाया और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ आईं। इस घटना ने स्थानीय राजनीति और स्वास्थ्य विभाग में भी हड़कम्प मचा दिया है।
हड्डी वार्ड में भयानक हालत मरीजों के सिर पर भी चूहे दौड़ रहे:
रिपोर्ट्स के अनुसार जबलपुर के अर्थोपेडिक्स/हड्डी वार्ड में चूहे बेड-साइड तक पहुँच रहे हैं कुछ वीडियो में वह मरीजों की प्लेट या टिफिन में हाथ साफ़ करते दिखाई दिए। इस प्रकार की घटनाएँ न केवल स्वच्छता का प्रश्न हैं बल्कि मरीजों की सेहत और संक्रमण के जोखिम को भी बढ़ाती हैं।
यह पहला मामला नहीं इससे पहले भी सामने आए गंभीर घटनाक्रम:
इंदौर के एमवाय (MY) हॉस्पिटल में कुछ महीने पहले दो नवजातों के अंग चूहों द्वारा कुतरे जाने की घटनाएँ भी सामने आई थीं यह बताता है कि समस्या एक-दो जगह सीमित नहीं है बल्कि राज्य के कई बड़े सरकारी अस्पतालों में फैल रही है।
कब तक टला? कारण और जवाबदेही पेस्ट कंट्रोल की कमी:
विशेषज्ञों और प्रशासन ने समस्या के कारणों में आवासीय संरचनात्मक गलतियाँ, पाइपलाइनों में छेद, वर्षा के पानी के कारण जलभराव और आवक-जावक पर भोजन लाने जैसी आदतों को जोड़ा है। कई जगहों पर चिकित्सालयों ने बाहरी कंपनियों पर की गई पेस्ट-कंट्रोल सेवाओं पर भी संदेह जताया अयोग्य या समय-समय पर न किया गया कीटनाशन यहाँ बड़ी वजह माना जा रहा है। कई अस्पतालों में स्वीकृत आउटसोर्स एजेंसियों को नोटिस भी भेजा जा चुका है और आंतरिक जाँच पैनल बना दिए गए हैं।
क्या कर रही है सरकार और अस्पताल प्रशासन?
स्थानीय प्रशासन ने वायरल वीडियो की जांच के निर्देश दिए हैं और कुछ मामलों में त्वरित-पेष्ट कंट्रोल अभियान, वार्डों की सीलिंग, और विजिलेंस बढ़ाने के निर्देश जारी किए गए हैं। लेकिन परिजनों और नागरिकों का कहना है कि यह केवल एंट्री-लेवल सुधार नहीं, बल्कि दीर्घकालिक इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधार, नियमित पेस्ट-ऑडिट और जिम्मेदार ठेकेदारों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई की ज़रूरत है।
मरीजों की जान पहले जरूरी है:
चूहे सिर्फ़ झूठी भयावहता नहीं हैं, वह अस्पतालों में संक्रमण, चोट और गंभीर परिणामों का कारण बन सकते हैं। जबलपुर विक्टोरिया हॉस्पिटल की घटना और इससे जुड़ी पुरानी घटनाएँ MP की स्वास्थ्य व्यवस्था के कमजोर ढाँचे पर बड़ी चेतावनी हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह त्वरित, पारदर्शी और सख्त कदम उठाकर मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करे वरना यह स्थिति और भयावह आकृतियाँ धारण कर सकती है।
