कामना कासोटिया भोपाल: धाराली में मलबे में दबी उम्मीदें, मदद पहुँचने में अभी 4 दिन और लगेंगे 60 घंटे बाद भी मशीनें नहीं पहुँचीं, रास्ते में भारी अड़चनें उत्तरकाशी (उत्तराखंड): उत्तरकाशी जिले के धाराली गांव में हाल ही में हुए भारी भूस्खलन और प्राकृतिक आपदा के बाद राहत और बचाव कार्य में बड़ी मुश्किलें आ रही हैं। अब तक 60 घंटे बीत जाने के बाद भी मलबा हटाने के लिए जरूरी मशीनें मौके पर नहीं पहुँच पाई हैं।

बताया जा रहा है कि, मलबा हटाकर राहत टीमों को मौके तक पहुँचने में अभी कम से कम 4 दिन और लगेंगे।आपदा का असर करीब 80 एकड़ में फैले क्षेत्र पर पड़ा है, जहाँ मलबा 20 से 50 फीट तक जमा हो गया है। मौके पर सिर्फ 3 जेसीबी मशीनें काम कर रही हैं, जो काफी नहीं हैं।

150 मीटर तक सड़क ध्वस्त हो गई है।

चार जगह भूस्खलन, एक पुल टूटा, दूसरा बहाधाराली की सड़क गंगोत्री से उत्तरकाशी को जोड़ती है, लेकिन इस मार्ग पर 4 जगह भारी भूस्खलन हुआ है और 100 से 150 मीटर तक सड़क ध्वस्त हो गई है। इसके अलावा दो बड़े पुल भी टूट चुके हैं—एक नाग मंदिर के पास और दूसरा सोंनगाड के पास का पुल बह गया है। इसके कारण धाराली पूरी तरह से बाकी इलाकों से कट गया है।

राहत कार्यों में अड़चन एसडीआरएफ और प्रशासन की टीमें लगातार राहत कार्य में जुटी हैं, लेकिन भारी मलबा और टूटे हुए रास्ते के कारण मशीनों को मौके तक पहुँचाने में दिक्कत हो रही है। रास्ते में फंसे लोगों को निकालना भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

अभी तक 20 फीट मलबा हटाया गया है

एसडीआरएफ कमांडर अर्पण यदुवंशी ने बताया कि मलबा और टूटी सड़कों के कारण राहत सामग्री और मशीनें अंदर नहीं पहुँच पाई हैं। अभी तक 20 फीट मलबा हटाया गया है, लेकिन लगभग 60 फीट तक मलबा जमा है, जिसे हटाने में कई दिन लग सकते हैं।307 पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया आपदा से एक दिन पहले ही गंगोत्री में लगभग 500 पर्यटक मौजूद थे। सेना और स्थानीय प्रशासन की मदद से अब तक 307 पर्यटकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

प्रशासन ने हेलीकॉप्टर और ड्रोन की मदद से राहत सामग्री पहुँचाने की योजना बनाई

इनमें महाराष्ट्र, हरियाणा, तेलंगाना, गुजरात, राजस्थान और दिल्ली के लोग शामिल हैं।स्थानीय लोग कर रहे मदद, प्रशासन अलर्ट स्थानीय लोग भी बचाव कार्यों में मदद कर रहे हैं और कई लोग रास्तों से मलबा हटाने में स्वयंसेवकों की तरह काम कर रहे हैं। प्रशासन ने हेलीकॉप्टर और ड्रोन की मदद से राहत सामग्री पहुँचाने की योजना बनाई है।

बड़ी चुनौतियां अभी बाकी हैं बीआरओ और राज्य आपदा प्रबंधन की टीमें सड़कों और पुलों की मरम्मत में जुटी हैं, लेकिन तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं। टेलीमैट्रिक सिस्टम से जानकारी मिल रही है कि बारिश के कारण भूस्खलन का खतरा अभी भी बना हुआ है।धाराली में हालात बेहद गंभीर हैं। मलबे और टूटे रास्तों के कारण राहत कार्यों में बहुत देरी हो रही है। प्रशासन पूरी कोशिश कर रहा है, लेकिन जब तक रास्ते पूरी तरह नहीं खुलते, तब तक मदद का पहुँचना मुश्किल बना रहेगा। स्थानीय लोगों और बचाव दलों की मेहनत ही अब उम्मीद की एकमात्र किरण है।

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