Baljinder Kaur: हाल ही में हुए विमान हादसों के बाद जांच एजेंसियों की सबसे पहली कोशिश ब्लैक बॉक्स को ढूंढने की होती है क्योंकि यही उपकरण हादसे की असली वजह तक पहुंचने की सबसे अहम कड़ी माना जाता है।
प्लेन क्रैश के बाद कैसे सामने आता है सच?
जब भी किसी विमान हादसे की खबर आती है तो सबसे पहले एक शब्द सुनने को मिलता है—ब्लैक बॉक्स। आम लोगों के मन में यही सवाल होता है कि आखिर ये ब्लैक बॉक्स क्या होता है, कैसे काम करता है और विमान दुर्घटना के रहस्य को कैसे उजागर करता है? दिलचस्प बात यह है कि नाम भले ही ब्लैक बॉक्स हो, लेकिन इसका रंग काला नहीं बल्कि चमकीला नारंगी होता है।
क्या होता है ब्लैक बॉक्स?
ब्लैक बॉक्स विमान में लगा एक बेहद मजबूत और सुरक्षित रिकॉर्डिंग उपकरण होता है। असल में यह कोई एक डिब्बा नहीं बल्कि दो अलग-अलग रिकॉर्डर का संयोजन होता है जो उड़ान से जुड़ी हर अहम जानकारी सुरक्षित रखते हैं।
कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) क्या रिकॉर्ड करता है?
CVR पायलट और को-पायलट के बीच हुई बातचीत को रिकॉर्ड करता है। इसमें शामिल होता है—
टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान की बातचीत।
पायलटों के फैसले और चेतावनियां।
एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से हुआ संवाद। इससे जांच एजेंसियों को यह समझने में मदद मिलती है कि हादसे से पहले कॉकपिट में क्या स्थिति थी और पायलट ने किन हालातों का सामना किया।
फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) की भूमिका
FDR विमान की तकनीकी जानकारी रिकॉर्ड करता है, जैसे—
विमान की गति और ऊंचाई।
इंजन की स्थिति।
फ्लैप्स और दिशा में हुए बदलाव।
यह डेटा बताता है कि दुर्घटना के समय विमान तकनीकी रूप से किस हालात में था।
ब्लैक बॉक्स कैसे करता है काम?
हादसे के बाद DGCA और एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की टीमें सबसे पहले ब्लैक बॉक्स की तलाश करती हैं। CVR और FDR से मिले डेटा के विश्लेषण से यह साफ होता है कि दुर्घटना तकनीकी खराबी, खराब मौसम, पायलट की गलती या अन्य परिस्थितियों की वजह से हुई।यही जानकारी भविष्य में विमान सुरक्षा और पायलट ट्रेनिंग को बेहतर बनाने में भी काम आती है।
ब्लैक बॉक्स का रंग नारंगी क्यों होता है?
हालांकि इसे ब्लैक बॉक्स कहा जाता है लेकिन इसका रंग चमकीला नारंगी होता है। इसकी वजह है:
नारंगी रंग मलबे, धुएं या पानी में भी दूर से दिख जाता है।
इसमें लोकेटर बीकन लगा होता है, जो समुद्र या गहरे पानी में सिग्नल भेजता रहता है।
इसका मजबूत मेटल कवर इसे आग, दबाव और जोरदार झटकों से बचाता है।
ब्लैक बॉक्स की मजबूती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि
यह 1100 डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी सह सकता है और 3400G तक के झटके झेल सकता है।
30 दिन तक पानी में डूबा रहने के बाद भी इसका डेटा सुरक्षित रहता है।
ब्लैक बॉक्स विमान की सुरक्षा व्यवस्था का सबसे भरोसेमंद गवाह होता है। हादसे के बाद जब हर सबूत मिट जाता है तब भी यही उपकरण चुपचाप सच्चाई को सहेज कर रखता है। जांच एजेंसियों के लिए यह सिर्फ एक डिब्बा नहीं बल्कि उस हादसे की पूरी कहानी होता है जो भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने में मदद करता है।
