शिवानी यादव –
लंदन के सेंट जॉन्स वुड में स्थित लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान की शुरुआत 1814 में थॉमस लॉर्ड ने की थी। इससे पहले मैरीलिबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) ने 1787 में दो अलग‑अगल मैदानों पर खेला, लेकिन वे अस्थायी थे। तीसरा मैदान यहीं बना और 1822 में पहला क्लब‑हाउस तैयार हुआ।
पहला रिकॉर्ड मैच 1814 में एमसीसी और हरटफोर्डशायर के बीच खेला गया। 1884 में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया ने पाँच दिन तक पहला टेस्ट मैच खेला, जिससे “एशेज़” श्रृंखला की नींव पड़ी। 1932–33 की बॉडीलाइन श्रृंखला ने विवादास्पद गेंदबाज़ी तकनीक से क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी।
1975, 1979, 1983, 1999 और 2019 में पाँच बार क्रिकेट विश्वकप का फाइनल लॉर्ड्स में हुआ। 2005 के चौथे एशेज़ टेस्ट ने इंग्लैंड को ऑस्ट्रेलिया पर रोमांचक जीत दिलाई। 2013 में पहली बार महिला टेस्ट मैच (इंग्लैंड-विरुद्ध-ऑस्ट्रेलिया) खेला गया। कोविड‑19 महामारी के दौरान 2020 में दर्शकों के बिना अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की वापसी लॉर्ड्स में हुई। 2022 में नए फॉर्मेट “द हंड्रेड” का फाइनल भी इसी मैदान पर खेला गया। हाल के वर्षों में टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों ने आधुनिक युग के सितारों को मंच दिया।
क्यों है ये ख़ास
लॉर्ड्स का विकेट इसकी मिट्टी और घास के अनूठे मिश्रण से बनता है। सफ़ेद चाक जैसी मिट्टी और कोमल हरी घास गेंद को संतुलित उछाल देती है। पिच में फ्रंट और बैक के बीच लगभग दो मीटर की ढलान होती है, जिससे गेंदबाज़ को बाउंस और कटरिंग का फायदा मिलता है। मैच शुरू होने से पहले भारी रोलर से पिच चिकनी की जाती है, और बीच‑बीच में हल्का रोलर चलाकर स्पिन सुनिश्चित किया जाता है। बारिश से बचने के लिए प्रभावी जल निकासी व्यवस्था मौजूद है, जिससे खेल में देर नहीं होती। मैदान का “लॉन्ग रूम” प्रसिद्ध है, जहाँ से बल्लेबाज़ मैदान में कदम रखते हैं; दीवारों पर क्रिकेट के पुराने सचित्र प्रसंग सजाए गए हैं। “ऑनर्स बोर्ड” पर शतक लगाने वाले बल्लेबाज़ों और पाँच विकेट लेने वाले गेंदबाज़ों के नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज होते हैं , यह किसी भी खिलाड़ी का सपना होता है।
भारतीय बल्लेबाज़ ऑनर्स बोर्ड पर
लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड पर अपना नाम दर्ज कराने वाले भारतीय बल्लेबाज़ों में ये महान खिलाड़ी शामिल हैं:
- विनू मांकड़ (184 रन, 1952)
- दिलीप वेंगसरकर (103 रन, 1979; 157 रन, 1982; 126* रन, 1986)
- गुंडप्पा विश्वनाथ (113 रन, 1979)
- रवि शास्त्री (100 रन, 1990)
- मोहम्मद अज़हरुद्दीन (121 रन, 1990)
- सौरव गांगुली (131 रन, 1996)
- अजित अगरकर (109* रन, 2002)
- राहुल द्रविड़ (103* रन, 2011)
- अजिंक्य रहाणे (103 रन, 2014)
- केएल राहुल (129 रन, 2021)
इस सूची में विनू मांकड़ इकलौते ऐसे खिलाड़ी हें जिनका नाम ऑनर्स बोर्ड के गेंदबाजों की सूची में भी दर्ज है।
लॉर्ड्स की लाल‑ईंट की बनावट और पुरानी वास्तुकला इसे और भी आकर्षक बनाती है। मैदान के भीतर स्थित क्रिकेट संग्रहालय में “एशेज़ की राख की डिबिया”, पुराने बल्ले‑ग्लव्स और खिलाड़ियों की यादगार तस्वीरें सुरक्षित हैं। मैरीलिबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) आज भी लॉर्ड्स के नियम और परंपराएँ बनाता है।
दो सौ साल से भी अधिक पुराना यह मैदान टेस्ट, एकदिवसीय, ट्वेंटी ट्वेंटी, विश्व कप और फ्रेंचाइज़ी टूर्नामेंट्स का गवाह है। लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान सिर्फ एक खेल का स्थल नहीं, बल्कि क्रिकेट की भावना का जीवंत प्रतीक है, जिसे दुनिया “क्रिकेट का मंदिर” कहकर अभिवादन देती है।
