कामना कासोटिया भोपाल:

अलास्का में ऐतिहासिक मुलाकात: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और रूसी राष्ट्रपति पुतिन आमने-सामने होंगे

अलास्का के सबसे बड़े शहर ऐंकरेज में 15 अगस्त को एक बेहद अहम मुलाकात होने जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सात साल बाद आमने-सामने बैठेंगे। इस बैठक का मुख्य मकसद रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने के रास्ते तलाशना है।दोनों नेताओं की मुलाकात एल्मडॉर्फ-रिचर्डसन मिलिट्री बेस पर होगी। यह मुलाकात “वन-टू-वन” यानी केवल दो नेताओं और एक ट्रांसलेटर की मौजूदगी में होगी। बैठक के बाद ही दोनों नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस में आकर जानकारी साझा करेंगे।

54 साल पुराना इतिहास दोहराएगा अलास्का बेस

यह वही सैन्य बेस है, जिसने 1971 में अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और जापान के राजा हिरोहितो की ऐतिहासिक मुलाकात की मेजबानी की थी। अब एक बार फिर यह जगह दुनिया की नज़रों में है।

पुतिन के लिए कड़ी सुरक्षा

पुतिन के अलास्का पहुंचने से पहले उनकी आर्मर्ड लिमोज़िन और अन्य वाहन रूस से कार्गो विमान द्वारा बेस पर पहुंच चुके होंगे। बैठक में इस्तेमाल होने वाली पानी की बोतल से लेकर कप तक, हर चीज़ को पुतिन की टीम सील करेगी, ताकि सुरक्षा में कोई चूक न हो।

अलास्का से 88 किलोमीटर दूर अनादिर में रूसी फाइटर जेट तैनात रहेंगे। पुतिन के साथ रूस की एफपीएसओ (फेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस) यूनिट भी मौजूद रहेगी, जो उनकी हर विदेश यात्रा में सुरक्षा की ज़िम्मेदारी संभालती है।

अमेरिकी सुरक्षा इंतज़ाम

एल्मडॉर्फ-रिचर्डसन बेस में पहले से ही 32,000 अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। ट्रम्प की सुरक्षा के लिए कैप्टन-11 रीकॉन सैटेलाइट्स भी एक्टिव रहेंगे। साइबर सुरक्षा के लिए पूरे बेस का इंटरनेट कनेक्शन काट दिया जाएगा।

बेस के अंदर और बाहर दोहरी लेयर सुरक्षा लागू होगी। पहली लेयर में मिलिट्री पुलिस और नेशनल गार्ड रहेंगे, जबकि दूसरी लेयर में स्पेशल फोर्सेस और सीक्रेट सर्विस की काउंटर-असॉल्ट टीम तैनात होगी। ट्रम्प के विमान उतरते ही उन्हें फुल-टाइम मिलिट्री गार्ड सुरक्षा घेरे में ले लेगा।

300 किलोमीटर तक नो-फ्लाई ज़ोन

पूरे 300 किलोमीटर के दायरे में नो-फ्लाई ज़ोन लागू किया जाएगा। यहां तक कि बेस के अंदर और बाहर सभी उड़ान गतिविधियों पर रोक होगी, ताकि किसी भी तरह का खतरा न रहे।

मुलाकात का महत्व

सात साल बाद हो रही यह बैठक केवल अमेरिका और रूस के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए अहम मानी जा रही है। यूक्रेन युद्ध को लेकर बढ़ते तनाव, वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक प्रतिबंध जैसे मुद्दों पर चर्चा की संभावना है। हालांकि, बैठक में क्या बातें होंगी, इस बारे में आधिकारिक जानकारी पहले से साझा नहीं की गई है।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति के विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह बैठक सकारात्मक माहौल में होती है, तो यह रूस और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।

दुनिया की निगाहें

अलास्का की यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है, जब दुनिया में कई मोर्चों पर तनाव और अस्थिरता बनी हुई है। ऐसे में ट्रम्प और पुतिन का एक साथ बैठना उम्मीद की किरण भी हो सकता है और एक नया भू-राजनीतिक संदेश भी।

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