रिया सिन्हा: बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) द्वारा सुनाई गई मौत की सजा पर संयुक्त राष्ट्र (UN) ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता ने एक बयान जारी कर यह स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र संगठन सभी परिस्थितियों में मृत्युदंड के खिलाफ अपनी अटल स्थिति पर कायम है।
यूएन की अटल स्थिति: मृत्युदंड का सार्वभौमिक विरोध
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने भी इस फैसले पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। OHCHR ने माना कि, ‘यह पिछले साल छात्र विरोध प्रदर्शनों के हिंसक दमन के दौरान हुए गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के पीड़ितों के लिए न्याय की मांग के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण घटना है।’
निष्पक्ष सुनवाई और अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर चिंता
हालांकि, OHCHR ने इस बात पर जोर दिया कि, सभी न्यायिक कार्यवाही, खासकर अंतर्राष्ट्रीय अपराधों से संबंधित आरोपों पर, निष्पक्ष सुनवाई और ‘ड्यू प्रोसेस’ के अंतर्राष्ट्रीय कानूनी मानकों का पूरी तरह से पालन करना चाहिए। मानवाधिकार कार्यालय ने इस बात पर विशेष चिंता जताई कि यह मुकदमा अभियुक्त की अनुपस्थिति में चलाया गया, और इसका परिणाम मृत्युदंड है।
अपराधों का दोषी ठहराना और न्याय की अनिवार्यता
शेख हसीना, जो अगस्त 2024 में अपनी सरकार गिरने के बाद से भारत में हैं, को जुलाई 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और हत्याओं का मास्टरमाइंड माना गया है। उन्हें ‘मानवता के खिलाफ अपराधों’ का दोषी ठहराया गया है। संयुक्त राष्ट्र ने एक तरफ पीड़ितों के लिए प्रभावी न्याय सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया है, वहीं दूसरी तरफ मौत की सजा के अपने दृढ़ और सैद्धांतिक विरोध को दोहराया है।

