रिया सिन्हा: अमेरिकी सेना ने प्रशांत महासागर के पूर्वी क्षेत्र में एक बार फिर मादक पदार्थ की तस्करी के संदेह में एक नौका को निशाना बनाया है। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने बुधवार को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि खुफिया जानकारी के आधार पर इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया। उन्होंने कहा कि यह नौका ज्ञात नशीले पदार्थों के रास्तों से गुज़र रही थी। इस हमले में नौका पर सवार चार लोगों की मौत हो गई है। यह हमला अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में किया गया और किसी भी अमेरिकी बल को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। इस कार्रवाई के साथ ही सितंबर की शुरुआत से अब तक इस अभियान में मारे गए लोगों की कुल संख्या 61 हो गई है।

ड्रग तस्करों के खिलाफ सख्त अभियान

ट्रंप प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे इस सख्त एंटी-ड्रग्स अभियान के तहत अमेरिका लगातार प्रशांत और कैरिबियन सागर में संदिग्ध नौकाओं को निशाना बना रहा है। हेगसेथ ने इन मादक पदार्थ तस्करों को ‘नार्को-आतंकवादी’ बताते हुए कहा है कि ये अल-कायदा से भी ज्यादा अमेरिकियों को मार रहे हैं। उन्होंने अपनी घोषणा में कहा कि “हम उनका पता लगाएंगे, नेटवर्क बनाएंगे, और फिर उनका शिकार करके उन्हें मारेंगे।” यह अभियान अमेरिका की आंतरिक सुरक्षा की रक्षा के लिए आवश्यक कदम बताया जा रहा है।

कानूनी और राजनीतिक विवाद

हालांकि, इस तरह के सैन्य हमलों को लेकर अमेरिका के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी और राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। कई डेमोक्रेट सांसदों और कानूनी विशेषज्ञों ने इन कार्रवाइयों की वैधता पर सवाल उठाए हैं, उनका कहना है कि ऐसे अभियानों की जिम्मेदारी अमेरिकी कोस्ट गार्ड की होती है, न कि सेना की। इसके अलावा, प्रशासन ने इन हमलों को सही ठहराने के लिए सार्वजनिक रूप से कोई ठोस सबूत या विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है, जिससे यह अभियान सवालों के घेरे में है। मेक्सिको, कोलंबिया और वेनेजुएला के साथ अमेरिका के संबंध भी इन कार्रवाइयों के कारण तनावपूर्ण हुए हैं।

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