रिया सिन्हा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार पाने का इंतजार एक बार फिर खत्म नहीं हुआ। नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने साल 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को देने का ऐलान किया है। उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान “वेनेजुएला के लोगों के लिए लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने और तानाशाही से लोकतंत्र की ओर शांतिपूर्ण बदलाव के लिए उनके अथक संघर्ष” के लिए दिया गया है। ट्रंप, जो लगातार खुद को शांति निर्माता बताते हुए इस पुरस्कार के प्रबल दावेदार होने का दावा कर रहे थे, इस दौड़ से बाहर हो गए।
ट्रंप को नकारे जाने के मुख्य कारण
डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने के पीछे नोबेल कमेटी के सख्त मानदंड मुख्य वजह रहे। कमेटी उन प्रयासों को प्राथमिकता देती है जिनके परिणाम स्थायी और दूरगामी होते हैं, जबकि ट्रंप के शांति प्रयासों को अल्पकालिक कूटनीतिक सौदों के रूप में देखा गया। नोबेल समिति के अध्यक्ष के अनुसार, पुरस्कार शांति स्थापित करने के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और निरस्त्रीकरण पर जोर देता है। ट्रंप का पेरिस जलवायु समझौते और अन्य वैश्विक संधियों से हटना उनके खिलाफ गया। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि कमेटी राजनीतिक दबाव के सामने झुकना नहीं चाहती थी, जिससे ट्रंप की ओर से की गई लगातार लॉबिंग का कोई असर नहीं पड़ा।
व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया और आगे का संदेश
पुरस्कार न मिलने पर व्हाइट हाउस की ओर से प्रतिक्रिया आई है, जिसमें कहा गया कि भले ही राष्ट्रपति ट्रंप को नोबेल नहीं मिला, लेकिन वह दुनिया में शांति स्थापित करने और युद्ध खत्म करने का काम जारी रखेंगे। व्हाइट हाउस ने नोबेल कमेटी पर राजनीति करने का भी आरोप लगाया। दूसरी ओर, वेनेजुएला की लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ता मारिया कोरिना मचाडो को यह सम्मान मिलना दुनिया के लिए एक संदेश है कि असली शांति उन हाथों से आती है जो संघर्ष के बीच भी साहस और दृढ़ संकल्प के साथ अन्याय के खिलाफ खड़े होते हैं।

