Muskan Garg: ब्रिटेन, जिसे दुनिया के सबसे सभ्य और सुरक्षित देशों में गिना जाता है, आज एक ऐसी घिनौनी समस्या से जूझ रहा है जिसने वहां की सामाजिक सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ‘ग्रूमिंग गैंग्स’ का आतंक न केवल लंदन बल्कि रॉदरहैम, मैनचेस्टर और ब्रिस्टल जैसे शहरों में भी पैर पसार चुका है। यहाँ मासूम बच्चियों को जाल में फंसाकर उनका शोषण किया जाता है।

आखिर क्या है ‘ग्रूमिंग’ और ये गैंग कैसे काम करते हैं?
ग्रूमिंग गैंग्स का काम करने का तरीका बेहद शातिराना और व्यवस्थित होता है। यह कोई अचानक होने वाली घटना नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश होती है।

• शिकार की पहचान: ये अपराधी अक्सर ऐसी लड़कियों को निशाना बनाते हैं जो भावनात्मक रूप से कमजोर हों, जिनके पारिवारिक संबंध ठीक न हों या जो सामाजिक रूप से अलग-थलग महसूस करती हों।

• विश्वास जीतना (The Hook): शुरुआत महंगे तोहफों, मोबाइल फोन, शराब या सिगरेट से होती है। अपराधियों का यह समूह इन लड़कियों को ‘प्यार’ और ‘सुरक्षा’ का झांसा देता है। उन्हें ऐसा महसूस कराया जाता है कि वे बहुत खास हैं।

• अलगाव (Isolation): एक बार जब लड़की उन पर भरोसा करने लगती है, तो उसे उसके परिवार और दोस्तों से दूर कर दिया जाता है। उसे धीरे-धीरे नशीली दवाओं या शराब का आदी बना दिया जाता है ताकि वह पूरी तरह गैंग पर निर्भर हो जाए।

• शोषण का चक्र: जब लड़की पूरी तरह उनके नियंत्रण में आ जाती है, तो उसे डराया-धमकाया जाता है। इसके बाद शुरू होता है सामूहिक बलात्कार और देह व्यापार का वह सिलसिला, जिसे सुनकर रूह कांप जाए।

सिस्टम की विफलता और चुप्पी:
ब्रिटेन में इस समस्या के विकराल होने का एक बड़ा कारण ‘पॉलिटिकल करेक्टनेस’ को माना गया है। कई सालों तक पुलिस और प्रशासन ने इन मामलों पर इसलिए कार्रवाई नहीं की क्योंकि उन्हें डर था कि अपराधियों की पहचान उजागर करने से उन पर ‘नस्लवादी’ होने का ठप्पा लग जाएगा। इसी झिझक का फायदा उठाकर इन ‘भेड़ियों’ ने हजारों जिंदगियां तबाह कर दीं।

क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
हाल के वर्षों में, रॉदरहैम और टेलफोर्ड जैसे स्कैंडल्स के सामने आने के बाद ब्रिटिश सरकार ने कड़े कानून बनाए हैं। पुलिस अब ‘ग्रूमिंग’ के संकेतों को पहचानने के लिए विशेष ट्रेनिंग ले रही है। समुदाय के स्तर पर भी जागरूकता बढ़ाई जा रही है ताकि माता-पिता अपने बच्चों के व्यवहार में बदलाव को समय रहते पहचान सकें।

चेतावनी के संकेत: यदि कोई युवक/युवती अचानक महंगे सामान लाने लगे, नए और संदिग्ध दोस्तों से मिलने लगे या घर वालों से बातें छिपाने लगे, तो यह खतरे की घंटी हो सकती है।

ब्रिटेन के लिए यह केवल अपराध का मुद्दा नहीं, बल्कि एक सामाजिक नासूर बन चुका है। जब तक इन गैंग्स के पीछे के नेटवर्क को जड़ से खत्म नहीं किया जाता, तब तक लंदन की सड़कें इन मासूमों के लिए असुरक्षित बनी रहेंगी।

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