Many agreement signed between India and Russia after Russia's President Vladimir Putin visit

रिया सिन्हा: भारत और रूस ने यूरेशियन आर्थिक संघ (EAEU) के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत में तेज़ी लाने पर सहमति व्यक्त की है। यह निर्णय हाल ही में हुई उच्च स्तरीय चर्चाओं के दौरान लिया गया। इस कदम का मुख्य उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच बढ़ते व्यापार घाटे को कम करना और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करना है। EAEU, जिसका नेतृत्व रूस करता है, में आर्मेनिया, बेलारूस, कज़ाख़स्तान और किर्गिस्तान भी सदस्य हैं। इस समझौते के लिए अगस्त 2025 में संदर्भ की शर्तों (Terms of Reference) पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसके बाद नवंबर 2025 में औपचारिक बातचीत शुरू हुई थी।

 व्यापार असंतुलन और आर्थिक लक्ष्य

FTA बातचीत को तेज़ करने का एक प्रमुख कारण भारत और EAEU के बीच व्यापार असंतुलन को ठीक करना है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में, दोनों के बीच व्यापार 68.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया था, जिसमें भारत का निर्यात केवल 4.88 बिलियन डॉलर था, जबकि आयात (मुख्यतः रूस से कच्चा तेल) 63.84 बिलियन डॉलर था। इस बड़ी खाई को पाटने के लिए दोनों देश वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 बिलियन डॉलर तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य साझा करते हैं। FTA से भारतीय व्यवसायों, खासकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), किसानों और मछुआरों के लिए नए बाजारों तक पहुँचने की उम्मीद है।

रणनीतिक और बाज़ार पहुंच का महत्व

यह FTA केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक महत्व भी रखता है। यह भारत को 6.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वाले बड़े बाज़ार तक पहुँच प्रदान करेगा। यह समझौता भारत को अपने निर्यात के लिए अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) जैसे पारंपरिक बाजारों पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा, खासकर ऐसे समय में जब भारत को कुछ पश्चिमी देशों से टैरिफ चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। समझौते के तहत फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, वस्त्र और कृषि उत्पादों जैसे भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिलने की प्रबल संभावना है। साथ ही, दोनों पक्ष द्विपक्षीय निवेश संधि पर भी काम में तेज़ी लाने पर सहमत हुए हैं, जो आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करेगा।

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