Baljinder Kaur: हाल ही में इथियोपिया (एथियोपिया) में स्थित हैली गुब्बी नामक ज्वालामुखी फटा, जिससे गुब्बारों में राख 14 किलोमीटर तक ऊपर उठी। यह राख बाद में हवा के साथ भारत तक पहुंच गई — एक घटना जो पहले शायद कभी कम-पहलू में सुनी गई थी। आमतौर पर ज्वालामुखी विस्फोट का असर आसपास के देशों पर ही पड़ता है, लेकिन इस बार राख का बादल इतनी लंबी दूरी तय कर दक्षिण एशिया तक पहुंच गया।
राख भारत तक कैसे पहुंची?
1. विस्फोट का जोर और गुबारा जब हैली गुब्बी ज्वालामुखी फटा, तो बहुत तेज विस्फोट हुआ और राख का गुबारा लगभग 14 किलोमीटर तक ऊपर उठ गया।
2. ऊपर ऊँचाई पर, वायुमंडलीय हवाएँ इस राख के बादलों को पश्चिम-पूर्व की दिशा में ले गईं। राख गुबारा पहले लाल सागर और अरब प्रायद्वीप (यमन, ओमान) की ओर फैला, और फिर आगे बढ़कर भारत की ओर चला गया।
3. वैज्ञानिकों और मौसम एजेंसियों के अनुसार, यह राखी बादल लगभग 100-120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है।
भारत के किन क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है?
गुजरात
राजस्थान
महाराष्ट्र का कुछ हिस्सा
दिल्ली-एनसीआर (ऊँचाई पर हल्का असर संभव)
क्या यह खतरा है?
विमानों के लिए ख़तरा: DGCA (भारत की नागरिक विमानन संस्था) ने चेतावनी जारी की है। राख विमान के इंजिन में घुस सकती है, जिससे इंजन खराब हो सकता है, दृश्यता कम हो सकती है। कई एयरलाइनों ने रूट बदलने या फ्लाइट रद्द करने का फैसला किया है।
वायु गुणवत्ता पर असर: हालांकि राख बादल बहुत ऊँचे स्तर (15,000-45,000 फीट) पर हैं, इसलिए ज़मीन पर सीधे बड़े स्तर पर एयर क्वालिटी इंडेक्स में तेज गिरावट की संभावना कम है। लेकिन आसमान का धुंधलापन होना कुछ इलाकों में बढ़ सकता है।
वायु-पर्यटन पर प्रभाव: एयरपोर्ट्स और उड़ान ऑपरेशन्स प्रभावित हो सकते हैं। कुछ रनवे पर राख जमा हो सकती है, जो सफाई और निरीक्षण की मांग करती है।
क्या यह लोगों की सेहत के लिए खतरनाक है?
बड़े स्तर पर खतरा नहीं, लेकिन हल्का-फुल्का असर संभव है:
आसमान कुछ घंटों/दिनों के लिए धुंधला दिख सकता है।
संवेदनशील लोगों (अस्थमा आदि) को बाहर कम निकलने की सलाह दी जाती है।
अत्यधिक दूरी तय करने के कारण राख की मात्रा कम हो जाती है, इसलिए गंभीर स्वास्थ्य खतरा सामान्यतः नहीं होता।
किन चीज़ों से बचें?
खुले में बहुत देर तक रहने से बचें।
अगर हवा में हल्की राख महसूस हो तो मास्क पहनें।
पानी ज्यादा पिएँ और घर की खिड़कियाँ बंद रखें।
इथियोपिया में हुए ज्वालामुखी विस्फोट की राख भारत तक पहुंचने में सफल रही है — यह मुख्य रूप से उच्च वायुमंडलीय हवाओं की वजह से संभव हो पाया। राख का अधिकांश हिस्सा ऊँचाई पर ही रहेगा, इसलिए जमीन पर जीवन सामान्य रहेगा—बस थोड़ी धुंधलाहट और सावधानी ज़रूरी है।
