Suvangi Pradhan: पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को दुनिया के लिए गंभीर खतरा बताया गया है, ऐसा खुलासा हाल ही में सार्वजनिक हुए 24 साल पुराने ट्रांसक्रिप्ट में हुआ है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के बीच 2001 में हुई गोपनीय बातचीत के दस्तावेज़ों के अनुसार पुतिन ने पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर गहरा असंतोष व्यक्त किया था।
ऐसे दस्तावेज़ याद दिलाते हैं कि परमाणु हथियार सिर्फ शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी का अहम हिस्सा हैं
ये बातचीत 16 जून 2001 को स्लोवेनिया में हुई थी, जिसमें पुतिन ने कहा कि पाकिस्तान केवल एक सैन्य शासन (जुंटा) है जिसके पास परमाणु हथियार हैं और यह लोकतांत्रिक नियंत्रण के बिना एक बड़ा वैश्विक खतरा पैदा करता है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि ऐसे देश के पास परमाणु क्षमता क्यों हो जबकि वहां लोकतंत्र और जवाबदेही मौजूद नहीं है।
पुतिन और बुश दोनों ही नेताओं ने पाकिस्तान के परमाणु नियंत्रण को गंभीर चुनौती के रूप में देखा था
पुतिन ने पाकिस्तान की आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता और परमाणु निर्णय प्रणाली पर चिंता जताई, जबकि बुश ने संवेदनशील तकनीक के प्रसार को रोकने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। ये दस्तावेज़ उस समय की वैश्विक चिंता को दर्शाते हैं जब पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय निगरानी और आलोचना का विषय बना हुआ था। पाकिस्तान ने 1998 के बाद से अपने परमाणु भंडार का विस्तार किया है और मिसाइल तथा तैनाती क्षमताओं पर निवेश बढ़ाया है, जिससे दक्षिण एशिया में परमाणु संतुलन और जोखिम का मुद्दा बना हुआ है।
दुनिया भर के राजनीतिक विशेषज्ञ इस खुलासों को वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण संकेत मान रहे हैं
पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर नियंत्रण का अभाव, अस्थिर राजनीतिक ढांचा और प्रबलित सैन्य प्रभाव इसे न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चिंता का कारण बनाते हैं। इसके अलावा, पूर्व में पाकिस्तान के नेटवर्क द्वारा संवेदनशील तकनीक को अन्य देशों तक पहुंचाने के आरोप भी उठे हैं, जिससे परमाणु प्रसार के जोखिम की बढ़ती तस्वीर सामने आती है।
