Suvangi Pradhan
भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड-डील को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। अमेरिका के एक वरिष्ठ मंत्री ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को सीधे फोन कॉल न किए जाने से ट्रेड-डील की बातचीत ठप हो गई। मंत्री के मुताबिक, ट्रम्प का ईगो हर्ट हुआ और इसी वजह से डील आगे नहीं बढ़ पाई।
इस बयान के बाद भारत ने कड़ा और तथ्यात्मक जवाब दिया है
अमेरिकी मंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ट्रम्प व्यक्तिगत संपर्क को बहुत महत्व देते हैं। उनका कहना था कि कई वैश्विक नेता ट्रम्प से सीधे संवाद करते रहे, लेकिन भारत की ओर से अपेक्षित कॉल न आने से गलत संदेश गया। मंत्री ने यह भी जोड़ा कि ट्रेड, टैरिफ और मार्केट एक्सेस जैसे मुद्दों पर सहमति बन सकती थी, अगर शीर्ष स्तर पर सीधी बातचीत होती।
भारत सरकार ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि यह बयान तथ्यहीन और भ्रामक है
विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच अलग-अलग मंचों और माध्यमों से कुल आठ बार बातचीत हुई है। इनमें फोन कॉल, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के दौरान द्विपक्षीय बैठकें और वर्चुअल संवाद शामिल हैं। भारत का कहना है कि ट्रेड-डील का रुकना किसी व्यक्तिगत अहंकार का नहीं, बल्कि तकनीकी और नीतिगत मतभेदों का परिणाम है। इन जटिल मसलों का समाधान केवल एक फोन कॉल से संभव नहीं था।
यह बयान अमेरिका की घरेलू राजनीति से भी जुड़ा हो सकता है
भारत ने हमेशा संस्थागत और प्रक्रिया-आधारित कूटनीति पर जोर दिया है। फिलहाल दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत बनी हुई है। रक्षा, तकनीक और इंडो-पैसिफिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में निरंतर संवाद जारी है। ट्रेड-डील पर बातचीत दोबारा शुरू होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है, लेकिन इसके लिए दोनों पक्षों को व्यावहारिक समझौते की ओर बढ़ना होगा, न कि व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप की ओर।

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