Suvangi Pradhan: डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन ने ग्रीनलैंड को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अगर ग्रीनलैंड पर किसी भी तरह का हमला हुआ, तो यह न केवल डेनमार्क बल्कि पूरे NATO गठबंधन के अस्तित्व पर सवाल खड़ा कर देगा।
ग्रीनलैंड पर हमला NATO के मूल सिद्धांतों के खिलाफ होगा और इससे गठबंधन की एकता टूट सकती है
प्रधानमंत्री फ्रेडरिकसन का यह बयान उस समय आया है, जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ग्रीनलैंड को खरीदने से जुड़े पुराने बयान और हालिया टिप्पणियां फिर से चर्चा में हैं। ट्रम्प पहले भी ग्रीनलैंड को अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से अहम बताते हुए उसे खरीदने की इच्छा जता चुके हैं, जिसका डेनमार्क ने कड़ा विरोध किया था।
इस मुद्दे पर डेनमार्क को यूरोप के 7 प्रमुख देशों का समर्थन मिला है
फ्रांस, जर्मनी, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, नीदरलैंड और स्पेन ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि ग्रीनलैंड का भविष्य केवल वहां के लोगों द्वारा ही तय किया जाएगा। इन देशों ने किसी भी बाहरी दबाव या सैन्य धमकी को अस्वीकार्य बताया। यूरोपीय नेताओं ने कहा कि ग्रीनलैंड एक स्वायत्त क्षेत्र है और उसके लोगों को आत्मनिर्णय का पूरा अधिकार है। संयुक्त बयान में यह भी कहा गया कि आर्कटिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान बेहद जरूरी है। किसी भी देश द्वारा बल प्रयोग या धमकी से वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होगी।
NATO की ताकत आपसी विश्वास और सामूहिक रक्षा के सिद्धांत पर टिकी है
ग्रीनलैंड रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह आर्कटिक क्षेत्र में स्थित है और यहां दुर्लभ खनिज संसाधनों के साथ-साथ सैन्य दृष्टि से भी अहम ठिकाने मौजूद हैं। इसी कारण वैश्विक शक्तियों की नजर इस क्षेत्र पर बनी रहती है। यूरोपीय देशों के इस एकजुट को ट्रम्प के बयानों के खिलाफ कड़ा संदेश माना जा रहा है। यह बयान न केवल ग्रीनलैंड की संप्रभुता की रक्षा करता है, बल्कि NATO और यूरोप की एकता को भी मजबूती देता है।

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