Suvangi Pradhan
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प स्विट्जरलैंड के दावोस में होने वाली वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) बैठक में हिस्सा लेने के लिए पहुंचने वाले हैं। इस दौरान उनका मुख्य फोकस ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर वैश्विक नेताओं और निवेशकों के साथ रणनीतिक चर्चा पर रहेगा।
ट्रम्प इससे पहले भी ग्रीनलैंड को अमेरिका के हितों के लिहाज से महत्वपूर्ण बताते रहे हैं
दावोस के मंच से ट्रम्प दुनिया के सामने वैश्विक राजनीति, ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और भू-राजनीतिक संतुलन पर अपने विचार रखेंगे। माना जा रहा है कि वे आर्कटिक क्षेत्र में संसाधनों के उपयोग, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और वहां अमेरिका की भूमिका को लेकर अपनी नई नीति की झलक भी पेश कर सकते हैं।
ट्रम्प की इस यात्रा के दौरान सात प्रमुख भारतीय उद्योगपतियों से उनकी मुलाकात भी संभव है
इन बैठकों में निवेश, टेक्नोलॉजी, रक्षा, ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हो सकती है। भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने के लिहाज से यह मुलाकातें काफी अहम मानी जा रही हैं। दावोस सम्मेलन में दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष, उद्योग जगत के नेता, नीति निर्माता और विशेषज्ञ शामिल होते हैं। ट्रम्प की मौजूदगी इस बार सम्मेलन को और भी सुर्खियों में लाने वाली है।
उनके समर्थक इसे वैश्विक मंच पर अमेरिका की मजबूत वापसी के संकेत के रूप में देख रहे हैं
ट्रम्प का दावोस दौरा सिर्फ एक भाषण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्रीनलैंड के भविष्य, वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत-अमेरिका रिश्तों जैसे कई अहम मुद्दों पर असर डाल सकता है। आने वाले दिनों में उनके बयान और बैठकों से अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय होने की उम्मीद है।
