Suvangi Pradhan: भोपाल शहर को रेल सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक नई सौगात के रूप में निशातपुरा रेलवे स्टेशन को हाल ही में विकसित किया गया है। आधुनिक सुविधाओं, आकर्षक भवन और बेहतर यात्री क्षमता के दावे के साथ शुरू हुए इस स्टेशन से उम्मीद थी कि यह भोपाल जंक्शन का दबाव कम करेगा और यात्रियों को बेहतर अनुभव देगा। लेकिन स्टेशन के शुरू होने के कुछ ही समय बाद यहाँ कई गंभीर समस्याएँ सामने आने लगी हैं, जिससे यात्रियों और स्थानीय लोगों में नाराज़गी बढ़ रही है।
सबसे बड़ी समस्या स्टेशन तक पहुँच की है
निशातपुरा स्टेशन को शहर के मुख्य हिस्सों से जोड़ने वाली सड़कों की हालत खराब है। सार्वजनिक परिवहन के पर्याप्त साधन नहीं होने से यात्रियों को ऑटो, ई-रिक्शा या निजी वाहन पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। रात के समय तो हालात और भी खराब हो जाते हैं, जब स्टेशन के बाहर सन्नाटा और असुरक्षा का माहौल रहता है।
स्टेशन परिसर के भीतर भी कई खामियाँ देखने को मिल रही हैं
प्लेटफॉर्म पर शेड की व्यवस्था अधूरी है, जिससे धूप और बारिश में यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ती है। पीने के पानी, शौचालय और बैठने की पर्याप्त व्यवस्था होने के दावे किए गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कई बार ये सुविधाएँ या तो बंद रहती हैं या उनकी साफ-सफाई ठीक नहीं होती। दिव्यांग यात्रियों के लिए रैंप और लिफ्ट जैसी सुविधाएँ भी पूरी तरह कार्यरत नहीं हैं।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं
स्टेशन पर सीसीटीवी कैमरों की संख्या सीमित है और रेलवे सुरक्षा बल की मौजूदगी नाकाफी बताई जा रही है। यात्रियों का कहना है कि शाम के बाद स्टेशन और उसके आसपास असामाजिक तत्वों का डर बना रहता है, जिससे महिलाएँ और बुज़ुर्ग खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।
क्या यह स्टेशन भोपाल के विकास की कहानी में एक मजबूत कड़ी बन सकेगा
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि स्टेशन के निर्माण के समय उनसे बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन आज भी मूलभूत समस्याएँ जस की तस हैं। उनका कहना है कि अगर समय रहते इन खामियों को दूर नहीं किया गया, तो यह नया स्टेशन अपने उद्देश्य में पूरी तरह सफल नहीं हो पाएगा। कुल मिलाकर, निशातपुरा स्टेशन का निर्माण भले ही एक सकारात्मक कदम हो, लेकिन इसे वास्तव में उपयोगी और यात्री-अनुकूल बनाने के लिए प्रशासन और रेलवे को जमीनी स्तर पर गंभीरता से काम करना होगा।
