इंदौर के इस पंडाल में लगभग ₹300 करोड़ की लागत से 30 एकड़ क्षेत्र में एक दिव्य नगरी बसाई गई है, जिसमें 12 ज्योतिर्लिंगों का दर्शन, माता के 52 शक्तिपीठों की झलक, और बारा ज्योतिर्लिंगों का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया गया है। यह आयोजन संत बसंत विजय आनंदगिरी महाराज की प्रेरणा से किया गया है।
पंडाल की प्रमुख विशेषताएँ
- 12 ज्योतिर्लिंगों का दर्शन: एक ही स्थान पर 12 ज्योतिर्लिंगों की भव्य प्रतिमाएँ स्थापित की गई हैं, जो श्रद्धालुओं को एक अद्भुत अनुभव प्रदान करती हैं।
- 52 शक्तिपीठों का दृश्य: माता के 52 शक्तिपीठों की झलक इस पंडाल में प्रस्तुत की गई है, जो धार्मिक प्रकार और आस्था की गहराई को दर्शाती है।
- 10,000 स्वर्ण कलशों का वितरण: नवरात्रि के अवसर पर 10,000 स्वर्ण कलशों का वितरण किया जाएगा, जो धार्मिक आस्था और समृद्धि का प्रतीक है।
- 1 करोड़ कुमकुम पूजा: 22 सितंबर से 2 अक्टूबर तक 1 करोड़ कुमकुम पूजा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें 30,000 किलो औषधियाँ और 7,000 लीटर घी से हवन किया जाएगा। अनुभव प्रदान करती हैं।
निर्माण में लगे कलाकारों की मेहनत
इस भव्य पंडाल के निर्माण में आंध्र प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से आए लगभग 500 से अधिक कलाकार पिछले तीन महीनों से काम कर रहे हैं। उनकी मेहनत और समर्पण ने इस पंडाल को एक अद्भुत रूप दिया है।
आकर्षक झलकियाँ
यह पंडाल न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सांस्कृतिक समृद्धि और सामाजिक एकता का भी उदाहरण प्रस्तुत करता है। श्रद्धालु इस पंडाल में आकर न केवल धार्मिक अनुभव प्राप्त कर रहे हैं, बल्कि एकता और भाईचारे का संदेश भी फैला रहे हैं।
इंदौर का यह नवरात्रि पंडाल न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह समाज में एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक समृद्धि का संदेश भी देता है। इस भव्य आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब समाज एकजुट होता है, तो कोई भी कार्य असंभव नहीं होता।
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