शिवानी यादव, कोलकाता: पश्चिम बंगाल की एक स्कूल गाइडबुक के एक पन्ने ने देशभर में विवाद खड़ा कर दिया है। किताब में भगवान श्रीराम को “विदेशी ” बताया गया है और यह दावा किया गया है कि अंग्रेज़ी का शब्द “रोमिंग” असल में “राम” नाम से बना है। साथ ही, रावण को “महान राजा” और “विद्वान ब्राह्मण” के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

यह पेज बंगाली भाषा में प्रकाशित एक परीक्षा गाइडबुक का है, जिसमें छात्रों को “संक्षिप्त और विश्लेषणात्मक उत्तर” देने के लिए तैयार किया गया है। यह किताब राज्य सरकार द्वारा नहीं, बल्कि निजी प्रकाशक द्वारा प्रकाशित की गई है, जिसका उपयोग राज्य के कुछ स्कूलों में छात्रों की परीक्षा तैयारी के लिए किया जा रहा है।

किताब में क्या लिखा है?
छात्रों से पूछा गया है, “राम और रोमिंग शब्दों में क्या समानता है?” उत्तर में लिखा गया है: “रोमिंग एक अंग्रेज़ी शब्द है। राम शब्द से रोमिंग शब्द की उत्पत्ति हुई है। राम दरअसल एक विदेशी आक्रांता थे, जो भारत में आकर बस गए। और दूसरी तरफ़ रावण को देवता का स्वरूप बताया।


कहां से सामने आया मामला?
यह जानकारी सबसे पहले हिन्दूपोस्ट और स्वराज्य जैसी वेबसाइटों पर सामने आई, जिन्होंने किताब के पेज की तस्वीर प्रकाशित की। इसके बाद यह पेज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और लोगों ने इसे हिंदू धार्मिक भावनाओं के अपमान के रूप में देखा।

क्यों हो रहा है विवाद?
शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि इस प्रकार की सामग्री छात्रों के मन में भ्रम पैदा करती है और धार्मिक-सांस्कृतिक मूल्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत करती है। कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि यह “बौद्धिक प्रदूषण” है, जिसके ज़रिए बच्चों को उनके सांस्कृतिक जड़ों से काटा जा रहा है।

हालांकि, यह किताब सरकारी पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं है, लेकिन इसका उपयोग राज्य के कई विद्यालयों में छात्रों को परीक्षा की तैयारी कराने के लिए किया जा रहा है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर से राज्य की शिक्षा व्यवस्था और उसमें प्रस्तुत की जा रही सामग्री की निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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