शिवानी यादव, दिल्ली: विश्व के जाने-माने अरबपति व टेस्ला के सीईओ एलन मस्क एक पहल ने अमेरिकी राजनीति में हलचल मचा दी। बीते शुक्रवार देर रात दाखिल हुए दस्तावेज़ों से खुलासा हुआ कि उन्होंने एक नई राजनीतिक इकाई अमेरिका पार्टी की स्थापना कर दी है। हालांकि, बाद में उन्होंने आधिकारिक रूप से भी इसकी घोषणा कर दी थी। यह कदम ऐसे वक्त पर आया है जब अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव की सरगर्मियां तेज़ हो रही हैं और रिपब्लिकन पार्टी में डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व को लेकर कई असहमति की आवाज़ें उठ रही हैं।
ट्रम्प से बढ़ती दूरी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह क़दम डोनाल्ड ट्रंप से उनकी विचारधारात्मक दूरी का परिचायक हो सकता है। हाल ही में अमेरिकी सीनेट में पारित हुए ‘वन बिग ब्यूटीफुल बिल’ पर मस्क ने सार्वजनिक रूप से नाराज़गी जताई थी, जिसे ट्रम्प खेमे का समर्थन प्राप्त था। मस्क ट्वीट करके कहा –
अब वक्त है कि अमेरिका के लोग विकल्पों की तलाश करें। अमेरिका पार्टी का मकसद नागरिकों को सरकार की जबरदस्ती से बचाना और सच्ची स्वतंत्रता की ओर लौटाना है।
ट्रंप समर्थकों ने इस फॉर्म फाइलिंग पर नाराज़गी जताई है, और कुछ दक्षिणपंथी थिंक टैंकों ने इसे “कंजरवेटिव वोट के विभाजन की चाल” बताया है।
अमेरिका पार्टी का उद्देश्य
आम नागरिकों को केंद्र में लाना और सत्ता के केंद्रीकरण को तोड़ना।
प्रमुख एजेंडा बिंदु:
सरकारी खर्च और घाटे में कटौतीव्यापार और इनोवेशन को बढ़ावा देना ,अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा , सैन्य क्षेत्र में AI का बेहतर इस्तेमाल, उच्च-कुशल प्रवासियों को अवसर सरकारी भ्रष्टाचार और लॉबिंग के खिलाफ़ कार्रवाई ।
मस्क की योजना फिलहाल सीमित है: वे केवल 8–10 हाउस सीटों और 2–3 सीनेट सीटों पर प्रभाव डालना चाहते हैं।
अमेरिका का मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य
वर्तमान में अमेरिका की राजनीति दो ध्रुवों में बंटी है। एक ओर जो बाइडन के नेतृत्व वाली डेमोक्रेटिक पार्टी, जो सामाजिक न्याय, जलवायु नीतियों और सरकारी सहायता कार्यक्रमों को आगे बढ़ा रही है। दूसरी ओर डोनाल्ड ट्रम्प के प्रभाव में चल रही रिपब्लिकन पार्टी, जो राष्ट्रवाद, कड़े इमिग्रेशन कानून और कर कटौती को प्राथमिकता देती है। इन दोनों के बीच का बड़ा हिस्सा स्वतंत्र, उदारवादी, युवा और तकनीकी समुदाय ऐसा वर्ग है जो किसी तीसरे विकल्प की तलाश में है। मस्क इसी “पोलिटिकल वैक्यूम” को भरने का प्रयास कर रहें।
अंतर्राष्टीय मीडिया की इस पहल पर टिप्पणी
ब्रिटेन का प्रतिष्ठित अखबार द गार्जियन मस्क की इस पहल को तकनीकी दखल के ज़रिए लोकतंत्र को पुनर्परिभाषित करने की कोशिश मानता है। इसके अनुसार तकनीक के ज़रिए चलाने की एक खतरनाक पहल मानता है। उसके मुताबिक ये ऐसा उदाहरण है जहाँ एक अमीर आदमी आम लोगों के नाम पर सत्ता में दखल देने की कोशिश कर रहा है।”
वहीँ दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स का कहना है कि मस्क की इस राजनीतिक घोषणा से कुछ निवेशक परेशान हैं। टेस्ला और स्पेसएक्स में पैसा लगाने वालों को अब यह चिंता हो रही है कि मस्क का राजनीति में आना उनके बिज़नेस पर बुरा असर डाल सकता है। इसे कारोबार और राजनीति के बीच टकराव की शुरुआत माना जा रहा है।
बीबीसी का कहना है कि भले ही मस्क की अमेरिका पार्टी अभी कुछ ही सीटों पर ध्यान दे रही हो, लेकिन उनकी सोशल मीडिया पर पकड़, टेक्नोलॉजी में प्रभाव और युवाओं के बीच लोकप्रियता उन्हें एक मजबूत ‘किंगमेकर’ यानी सत्ता को तय करने वाले नेता की भूमिका में ला सकती है खासकर अमेरिकी संसद के निचले सदन में। हालांकि, विश्व भर में सुर्खियां बटोरने वाली यह पार्टी के ऊपर विशेषज्ञों व विभिन्न मीडिया संस्थाओं की राय बटी हुई है, अब आने वाले चुनाव और समय में देखना होगा कि यह अपना प्रभाव बनाती है या सिर्फ़ सुर्खियों तक सिमट के रह जाएगी।
