गीत : साल 2026-27 में देश में पहली बार डिजिटल जनगणना होने जा रही है। इसके लिए जनगणना निदेशालय एक खास मोबाइल एप लॉन्च करेगा। यह एप एंड्रॉयड और आईफोन दोनों के लिए उपलब्ध रहेगा। इस एप की मदद से हर परिवार का मुखिया खुद अपने घर और परिवार की जानकारी भर सकेगा। इसमें नाम, उम्र, शिक्षा, रोजगार जैसी जरूरी जानकारी शामिल होगी। एप में डिटेल भरने के बाद जनगणना अधिकारी घर आकर सारी जानकारी की जांच करेंगे।

हर जनगणना कर्मचारी को करीब 150 से 175 घरों की जिम्मेदारी दी जाएगी।

सारी जानकारी सही पाए जाने पर उसे डिजिटल फॉर्म में अपलोड किया जाएगा। हर जनगणना कर्मचारी को करीब 150 से 175 घरों की जिम्मेदारी दी जाएगी।जनगणना शुरू होने से पहले, इसकी तैयारी के लिए प्रदेश के 3 जिलों में प्री-टेस्ट किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पूरी प्रक्रिया सही तरीके से चले और कोई तकनीकी गड़बड़ी न हो। इसके अलावा, गड़बड़ी रोकने के लिए सरकार ने फैसला लिया है कि प्रदेश की सभी प्रशासनिक सीमाओं को 31 दिसंबर 2025 की स्थिति में फ्रीज कर दिया जाएगा। डिजिटल जनगणना से काम तेजी से और पारदर्शिता से हो सकेगा। साल 2026 और 2027 में देश में पहली बार डिजिटल जनगणना दो चरणों में की जाएगी। इसके लिए भारत सरकार ने 16 जून 2024 को अधिसूचना जारी की है। यह आजादी के बाद भारत की 8वीं और कुल 16वीं जनगणना होगी।

जनगणना का पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा। इसमें मकानों की गिनती की जाएगी। हर घर को एक यूनिक नंबर दिया जाएगा और मकान का प्रकार, सुविधाएं, बिजली-पानी जैसी जानकारी एकत्र की जाएगी। जनगणना का दूसरा चरण 1 फरवरी 2027 से शुरू होगा। इसमें लोगों की संख्या, उम्र, लिंग, जाति, भाषा, शिक्षा, व्यवसाय और अन्य जरूरी जानकारियां जुटाई जाएंगी। इस बार जनगणना डिजिटल होगी, जिसके लिए सरकार एक मोबाइल एप भी लॉन्च करेगी। हर परिवार का मुखिया इस एप के जरिए खुद जानकारी भर सकेगा। इसके बाद जनगणना अधिकारी घर आकर इन जानकारियों की पुष्टि करेंगे।

शुरुआत में प्रदेश के 3 जिलों में इसका प्री-टेस्ट होगा।

जनगणना कर्मचारियों को 150 से 175 घरों की जिम्मेदारी दी जाएगी। शुरुआत में प्रदेश के 3 जिलों में इसका प्री-टेस्ट होगा।डिजिटल जनगणना से डेटा जल्दी और सही तरीके से इकट्ठा किया जा सकेगा। राज्य के 3 जिलों में यह अभियान चलेगा, सघन आबादी, वन क्षेत्र और आदिवासी इलाका शामिल होगा। मध्यप्रदेश में इसके लिए ग्वालियर, रतलाम और सिवनी जिलों का चयन किया गया है। यहां अक्टूबर से नवंबर माह के बीच 15 दिन का अभियान चलेगा।

इसमें जनगणना और हाउस गणना का काम किया जाएगा। फील्ड में आने वाली चुनौतियों की रिपोर्ट प्रदेश का जनगणना निदेशालय तैयार करेगा। इसके बाद यह रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी जाएगी। मंत्रालय इस आधार पर फाइनल जनगणना शीट तैयार करेगा। 31 दिसंबर के बाद प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव नहीं

भारत के महारजिस्ट्रार और जनगणना आयुक्त ने राज्य सरकार को पत्र भेजा है।

पत्र में लिखा है कि प्रदेश में प्रशासनिक सीमाओं में जो भी बदलाव करना है, वह 31 दिसंबर 2025 तक पूरा करना होगा। 1 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2027 तक सीमाएं फ्रीज रहेंगी और इस दौरान कोई भी बदलाव मान्य नहीं होगा। राज्य सरकार को अक्टूबर तक बदलाव पूरे करने होंगे। दरअसल, सीमाओं में बदलाव के बाद नोटिफिकेशन और अन्य प्रक्रियाओं में वक्त लग जाता है। बदलाव जिले, तहसील, राजस्व ग्राम, वन ग्राम, नगरीय निकाय, उनके वार्ड और ग्राम पंचायत की सीमाओं में किया जा सकता है।

लेकिन अगर 31 दिसंबर 2025 के बाद बदलाव हुआ तो उसे जनगणना में शामिल नहीं किया जाएगा। एक कर्मचारी को 175 मकानों की जिम्मेदारी जनगणना 2026 में हर कर्मचारी को 150 से 175 मकानों का सर्वे करना होगा। उन्हें डिजिटल फॉर्मेट में डेटा भरना होगा। इस बार डिजिटली जनगणना होने के चलते पहले से कम समय में पूरी होगी। तैयार रिपोर्ट राज्य स्तर पर कम्पाइल होकर केंद्र सरकार को भेजी जाएगी

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