रानू यादव: सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने इस मामले को दिल्ली हाईकोर्ट को भेज दिया है और दिल्ली हाईकोर्ट से सोमवार, 28 जुलाई को इस पर सुनवाई करने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म की रिलीज पर कोई रोक नहीं लगाई है और कहा है कि गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है। आगे का फैसला अब दिल्ली हाईकोर्ट पर निर्भर है। दिल्ली हाईकोर्ट की अगली सुनवाई सोमवार को होगी, और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाए।और फिल्म निर्माताओं ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली है।

फिल्म को लेकर केंद्र सरकार का सुझाव?
केंद्र सरकार की समिति ने फिल्म में 6 बदलाव करने सुझाव दिया है और ‘डिस्क्लेमर’ में संशोधन के साथ रिलीज को मंजूरी दी है।

क्या है 6 सुझाव?

1. फिल्म की कलात्मकता और किसी समुदाय के खिलाफ न होना (डिस्क्लेमर)।
2.क्रेडिट टाइटल्स में बदलाव।
3.एक AI जनित सीन में सऊदी-अरब के स्टाइल की पगड़ी को हटाना।
4.”नूतन शर्मा” नाम को किसी अन्य नाम से बदलना।
5.नूतन शर्मा द्वारा बोले गए एक विवादास्पद संवाद को हटाना।
6.”हाफिज” और “मक़बूल” के बीच बातचीत को हटाना।

इन बदलावों के साथ, केंद्र सरकार ने फिल्म की रिलीज को मंजूरी दे दी थी। फिल्म निर्माताओं ने भी इन सुझावों को स्वीकार कर लिया।

सुप्रीम कोर्ट का नया आदेश;
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए कहा कि उसकी ओर से फिल्म की रिलीज पर कोई रोक नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है और उचित आदेश पारित करना दिल्ली हाईकोर्ट पर निर्भर है। सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म निर्माताओं को दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी, क्योंकि सेंट्रल कमेटी के आदेश के बाद उनकी याचिका निरर्थक हो गई थी। कोर्ट ने कहा कि इन सभी विवादों ने फिल्म को अच्छी पब्लिसिटी दिलाई है।

फिल्म के कोर्ट जाने की पूरी कहानी?
दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले फिल्म की रिलीज पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद फिल्म मेकर्स अमित जॉनी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। दरअसल फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ राजस्थान के उदयपुर में 2022 में हुए कन्हैया लाल हत्याकांड पर आधारित है। इस घटना ने पूरे देश में सनसनी फैला दी थी। फिल्म के ट्रेलर रिलीज होने के बाद से ही यह विवादों में घिर गई थी। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी समेत अन्य लोगों का आरोप है कि फिल्म मुस्लिम समुदाय को बदनाम करती है और सांप्रदायिक सद्भावना को भड़का सकती है।

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