काजल जाटव, उज्जैन: श्रावण का त्योहार, जो भगवन शिव को समर्पित है आज से देश भर में मनाया जाएगा। श्रावण मास में भगवन शिव की पूजा अर्चना बड़े धूमधाम से की जाती है। यही श्रावण मास आज 11 जुलाई से शुरू हो चूका है। अब बात अगर भगवान शिव की हो रही है तो हम महाकाल की नगरी उज्जैन को कैसे ही भूल सकते हैं?
उज्जैन जहाँ 12 ज्योतिर्लिंग में से एक सबसे विशेष शिवलिंग यहाँ है जिसे हम महाकाल बुलाते हैं। महाकाल अर्थात, काल-जिससे बड़ा कोई नहीं, न देव, न दानव कोई नहीं.. है तो बस महाकाल। जिन दिनों की हम पूरे वर्ष बेसब्री से प्रतीक्षा करते हैं, वो समय आ चूका है, यह समय है श्रावण का।
उज्जैन में हर वर्ष श्रावण मास में महाकाल की सवारी का आयोजन होता है, जिसमे लाखों भक्तों की भीड़ उमड़ती है। लोग भगवान शिव की आराधना करते है, उनसे वरदान मांगते है। उज्जैन में निकाली जाने वाली इन सवारियों का बड़ा ही महत्त्व है। इन सवारियों में हम बाबा महाकाल के ठाट देखेंगे जिन्हें प्रत्येक व्यक्ति नमन करेगा। हर – हर का गान हर मन करेगा।
निकलेंगी 6 भव्य सवारियां
इस दौरान कुल 6 सवारियाँ निकली जाती हैं, जिनमे से 5 श्रावण मास में और अगली 2 भाद्रपद माह में निकली जाती है। हर बार की तरह इस बार भी उज्जैन बिलकुल तैयार है महाकाल की आराधना के लिये। ये 6 सवारियाँ माह के हर सोमवार को निकाली जाएंगी। ये सवारियाँ 14 जुलाई से 18 अगस्त तक निकाली जाएंगी जिनमें विभिन्न प्रकार की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी जिनके ज़रिये हमारे देश व उज्जैन की झलक दिखाई जाएगी जैसे नृत्य, बैंड, कलाएँ और पर्यटन स्थल आदि क्योंकि ये सब मिलकर हमारे विविधता वाले देश को एकता में परिवर्तित करते हैं।
- पहली सवारी जो की 14 जुलाई को निकलने वाली है-की थीम वैदिक उद्घोष रहेगी। इसमें मन महेश विराजमान होंगे
- दूसरी सवारी 21 जुलाई को विभिन्न भारतीय लोकनृत्य को दर्शाया जाएगा जैसे मटकी, बिहू, भवई आदि। इसके अंतर्गत श्री चंद्रमोलेश्वर सवारी में विराजमान होंगे।
- तीसरी सवारी 28 जुलाई को विभिन्न बैंड अपनी प्रस्तुति देंगे जैसे होम गार्ड बैंड, आर्मी बैंड और पुलिस बैंड आदि और इसमें श्री शिव तांडव को दर्शाया जाएगा।
- चौथी सवारी 4 अगस्त को श्मरी उमा महेश नंदी रथ पर सवार होंगे। प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों को दर्शाया जाएगा जैसे साँची स्तूप, भीमबेटका, खजुराहो के मंदिर, ग्वालियर का किला और भी बहुत कुछ।
- पांचवी सवारी 11 अगस्त को धर्म को समर्पित रहेगी जिसमें मध्यप्रदेश के धार्मिक पर्यटन और मंदिरों की झांकी निकाली जाएगी। इसमें रजत सवारी निकाली जाएगी।
- छटवी और आखरी सवारी 18 अगस्त को सप्तधातु मुखारविंद की होगी सवारी होगी जिसमे बाबा राजसी श्रृंगार में दर्शन देंगे। राजसी सवारी के अंतर्गत 70 से अधिक भजन मंडलियों की प्रस्तुती दी जाएगी। हर वर्ष के जैसे इस वर्ष भी श्रावण महोत्सव हर शनिवार को शाम 7:00 बजे से त्रिवेणी कला एवं पुरातत्व संग्रहालय के सभा कक्ष में आयोजित किया जाएगा। इन प्रस्तुतियों का आयोजन महाकाल परिसर में सप्तऋषि मूर्तियों के पास किया जाएगा।
इनके अतिरिक्त 13 जुलाई से 16 अगस्त तक हर दिन विभिन्न प्रकार की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी जो की महाकालेश्वर सांस्कृतिक संध्या के नाम से की होंगी जो कि महाकाल लोक परिसर में सप्त ऋषि मूर्तियों के पास प्रस्तुत की जाएंगी जिसमें देश भर के कलाकार मौजूद रहेंगे।
