रिपोर्ट, काजल जाटव: माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के जनसंचार विभाग के पूर्व छात्र श्री शिबू त्रिपाठी ने फिर साबित कर दिया है कि समर्पण, प्रतिभा और लगातार मेहनत से कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है। उन्हें बहुप्रतिष्ठित एशिया जर्नलिज्म फेलोशिप -2025 के लिए चुनना, पत्रकारिता की दुनिया में एक बड़ा सम्मान है। यह उनके व्यक्तिगत करियर की बड़ी कामयाबी के साथ-साथ हमारे देश के पत्रकारिता जगत के लिए भी गर्व की बात है।

शैक्षणिक बैकग्राउंड और प्रेरणा

शिबू त्रिपाठी ने माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय से जनसंचार की पढ़ाई की, जहां उन्होंने पत्रकारिता के मूल्यों, तकनीकी कौशल और सामाजिक जिम्मेदारियों को बहुत गहराई से समझा। यहीं से उन्हें समाज के मुद्दों पर लिखने और रिपोर्टिंग करने का शौक पैदा हुआ। उनके लेखों में समाज की हकीकत को सामने लाने की ताकत है, जो उन्हें एक संवेदनशील और जिम्मेदार पत्रकार बनाती है।

एशिया जर्नलिज्म फेलोशिप का महत्व

एशिया जर्नलिज्म फेलोशिप (AJF) एक ऐसी इंटरनेशनल पत्रकारिता अवॉर्ड है, जो एशिया के अलग-अलग देशों के चुनिंदा पत्रकारों को उनके काम और नजरिए के आधार पर दी जाती है। इसमें प्रतिभागियों को सिंगापुर के मशहूर मीडिया संस्थानों के साथ काम करने, रिसर्च करने और ग्लोबल पत्रकारिता को समझने का मौका मिलता है। यह फेलोशिप पत्रकारों को अलग-अलग संस्कृतियों और समाजों में काम करने का अनुभव कराती है।

शिबू त्रिपाठी की पत्रकारिता का अंदाज़

शिबू की पत्रकारिता में गहराई, संवेदनशीलता और निष्पक्षता साफ दिखती है। उन्होंने गांवों, शिक्षा, स्वास्थ्य और महिलाओं के अधिकार जैसे मुद्दों पर कई शानदार रिपोर्ट लिखीं हैं। उनकी लेखनी में सिर्फ तथ्य ही नहीं, बल्कि उन कहानियों का भी जिक्र है जिनके पीछे इंसानों की जद्दोजहद छिपी होती है, जिससे पढ़ने वाले सोचने पे मजबूर हो जाते हैं।

 बधाई और शुभकामनाएँ

शिबू त्रिपाठी को एशिया जर्नलिज्म फेलोशिप-2025 के लिए चुने जाने पर दिल से मुबारकबाद और शुभकामनाएँ। ये सफलता युवा पत्रकारों के लिए प्रेरीणा का स्रोत है और यह दिखाती है कि भारतीय पत्रकारिता अब भी ग्लोबल मंच पर अपनी पहचान बना रही है। माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भी इस सम्मान के हिस्सेदार हैं, जिन्होंने ऐसे टैलेंटेड पत्रकार को संवारने में मदद की।

यह उपलब्धि सिर्फ शिबू की नहीं, बल्कि उन सभी स्टूडेंट्स, टीचर्स और इंस्टीट्यूशंस की भी है, जो पत्रकारिता को मिशन मानते हैं। उम्मीद है कि वे इस फेलोशिप का इस्तेमाल और भी प्रभावशाली काम करने में करेंगे और भारत की पत्रकारिता को नए तरीके से ऊंचाइयों पर पहुंचाएंगे।

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