रिपोर्ट, काजल जाटव: ट्रंप का आभार जताते हुए भारत में अमेरिकी राजदूत के रूप में अपनी नई भूमिका के लिए गोर ने अपनी खुशी जाहिर की। इस खबर ने दोनों देशों में चर्चा का माहौल बना दिया है। अमेरिका में राजनीति के गलियारे में अब गोर का नाम चर्चा में है, क्यूंकि उन्हें पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत में अमेरिका का प्रतिनिधि बनाने का निश्चय किया है।
ट्रंप के इस फैसले के बाद से ही गोर ने सार्वजनिक रूप से ट्रंप को धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा है कि यह उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है। उनके इस बयान ने दुनियाभर में हलचल मचा दी है।
ट्रंप के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हुए गोर ने कहा-
“मुझे भारत जैसे महान देश में अमेरिका का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलना कोई छोटा काम नहीं है। मैं राष्ट्रपति ट्रंप का दिल से धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने मुझ पर भरोसा जताया।” यह बात उनके भारतीय संस्कृति और मान्यताओं के प्रति उनके सम्मान और प्यार को दिखाती है।
गोर, जो ट्रंप के भरोसेमंद सहयोगी रहे हैं, लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी का हिस्सा हैं और कई अहम नीतिगत मामलों में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने अमेरिका-भारत के मजबूत रिश्ते को और मजबूत बनाने की इच्छा भी जताई है।
रिपब्लिकन नेता मार्को रूबियो ने भी इस फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने कहा, “सर्गियो गोर का भारत में दूत बनना एक बहुत अच्छा कदम है। उनके पास वह दूरदृष्टि और नेतृत्व है जो दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में मदद करेगा।” यह बयान दिखाता है कि गोर को रिपब्लिकन पार्टी के बीच काफी समर्थन मिल रहा है।
क्या यह भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा दिखाता है?
यह नियुक्ति खासतौर पर ऐसे वक्त में हुई है जब दोनों देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक साझेदारी और रणनीतिक गठबंधन मजबूत हो रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति, जो ट्रंप की विचारधारा के करीब है और दक्षिण एशियाई मामलों में रुचि रखता है, भारत में राजदूत बनता है, तो इससे संबंधों में नई तेजी आ सकती है।
गोर का मीडिया, प्रकाशन और राजनीतिक धारणा में खास अनुभव रहा है। वे ‘Winning Team Publishing’ के सह-संस्थापक भी हैं, जो ट्रंप की पुस्तकें प्रकाशित करता है। उनकी संवाद से जुड़ी क्षमता और जनता के साथ बेहतर संवाद करने की कला को देखते हुए, उम्मीद है कि वे डिप्लोमेसी में भी अच्छा काम करेंगे।
भारत में अमेरिका के नए राजदूत का यह ऐलान सिर्फ एक राजनयिक कदम नहीं है, बल्कि यह एक संकेत है कि ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति फिर से अंतरराष्ट्रीय मंच पर आ सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प रहेगा कि गोर कैसे भारत-अमेरिका संबंधों में नई ऊर्जा देते हैं और दोनों देशों के बीच नई साझेदारी खोलते हैं।
