रिपोर्ट रोहित रजक: भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के काफिले में उस समय हड़कंप मच गया जब उनकी गाड़ियां एक-एक कर रास्ते में बंद होने लगीं। यह घटना 26 जून की रात की है, जब मुख्यमंत्री रतलाम में होने वाले ‘एमपी राइज 2025 कॉन्क्लेव’ में शामिल होने के लिए इंदौर से रवाना हुए थे। उनके काफिले में कुल 19 इनोवा कारें थीं। रास्ते में डोसीगांव स्थित भारत पेट्रोलियम के शक्ति फ्यूल्स पेट्रोल पंप से सभी गाड़ियों में डीजल भरवाया गया। लेकिन डीजल भरने के कुछ ही किलोमीटर बाद सभी गाड़ियां रुक-रुक कर बंद होने लगीं।
गाड़ियों के अचानक बंद होने से सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई। मुख्यमंत्री की सुरक्षा को लेकर अधिकारी तुरंत अलर्ट हो गए।

सभी गाड़ियों को सड़क के किनारे धक्का देकर खड़ा किया गया। घटना की सूचना मिलते ही नायब तहसीलदार आशीष उपाध्याय, खाद्य और आपूर्ति अधिकारी आनंद गोरे सहित प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। उन्होंने तुरंत जांच शुरू की। सभी गाड़ियों के फ्यूल टैंक खोलकर चेक किया गया।
जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
हर गाड़ी में भरे गए 20 लीटर डीजल में से लगभग आधा हिस्सा यानी 10 लीटर तक पानी निकला। पानी मिले डीजल के कारण इंजन फेल हो गए और गाड़ियां बंद हो गईं। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी और एक बड़ी दुर्घटना होने से बच गई।
सिर्फ मुख्यमंत्री की गाड़ियां ही नहीं, उसी पेट्रोल पंप से डीजल भरवाने वाला एक ट्रक भी कुछ ही दूर जाकर बंद हो गया। ट्रक ड्राइवर ने भी डीजल में मिलावट की शिकायत की। प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए पेट्रोल पंप को सील कर दिया और नमूने जांच के लिए भेज दिए।
भारत पेट्रोलियम के एरिया मैनेजर ने सफाई में क्या कहा
भारत पेट्रोलियम के एरिया मैनेजर श्रीधर ने प्रारंभिक सफाई में कहा कि भारी बारिश के चलते टैंक में पानी घुसने की आशंका है। हालांकि, प्रशासन इस मामले को बेहद गंभीर मान रहा है और पेट्रोल पंप की लापरवाही की विस्तृत जांच की जा रही है।
यह घटना केवल तकनीकी लापरवाही नहीं बल्कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा में एक बड़ी चूक के रूप में देखी जा रही है। अगर समय रहते गाड़ियां बंद न होतीं तो किसी गंभीर हादसे की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता था।
फिलहाल मुख्यमंत्री की यात्रा को वैकल्पिक वाहनों से जारी रखा गया और उन्हें सुरक्षित रतलाम पहुंचाया गया। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने राहत की सांस ली, लेकिन यह घटना सरकार के लिए एक चेतावनी साबित हुई है।
इस घटना के बाद अन्य जिलों में भी पेट्रोल पंपों की गुणवत्ता जांचने के आदेश दिए जा सकते हैं। वहीं शक्ति फ्यूल्स पेट्रोल पंप पर आगे की कार्रवाई तय करने के लिए संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांगी गई है।
यह मामला न केवल लापरवाही का प्रतीक है, बल्कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा में एक गहरी सेंध की तरह देखा जा रहा है।
