शिवानी यादव। श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर की पवित्र गुफा अमरनाथ की ओर श्रद्धालुओं का कारवां एक बार फिर आस्था और विश्वास के साथ रवाना हो गया है। 38 दिन तक चलने वाली अमरनाथ यात्रा गुरुवार को आधिकारिक रूप से शुरू हो गई। पहले दिन करीब 5,892 श्रद्धालुओं का जत्था जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप से रवाना हुआ, जिसे उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने झंडी दिखाकर रवाना किया।
श्रद्धालु दो मार्गों — बालटाल (14 किमी) और पहलगाम (48 किमी) — से गुफा की ओर बढ़ रहे हैं, जहाँ बर्फ से बना प्राकृतिक शिवलिंग स्थित है। यह शिवलिंग हर साल सावन मास में स्वयं प्रकट होता है और चंद्रमा के घटने-बढ़ने के साथ इसका आकार बदलता है।
सुरक्षा के विशेष इंतज़ाम
हाल ही में घाटी में हुई आतंकी घटनाओं के मद्देनज़र प्रशासन ने यात्रा के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की है। इस बार श्रद्धालुओं को आरएफआईडी टैग, क्यूआर कोड, निगरानी कैमरे और “मदद करें” महिला केंद्रीय सुरक्षा बल की टीमें उपलब्ध कराई गई हैं। पूरे मार्ग में कई कमांड कंट्रोल रूम और डॉक्टरों की टीम भी तैनात की गई है।
आस्था पर आतंक नहीं भारी
हालाँकि कुछ हफ्ते पहले पहलगाम में आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए थे, लेकिन श्रद्धालुओं का जोश कम नहीं हुआ। “बम-बम भोले” के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने कहा कि आतंक से डरकर धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा जा सकता।
अमरनाथ यात्रा का पौराणिक इतिहास
अमर कथा और शिव-पार्वती संवाद के स्वरूप पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव ने माता पार्वती को यहीं पर “अमर कथा” सुनाई थी, जिसमें उन्होंने जीवन और मृत्यु का रहस्य बताया। कथा को गुप्त रखने के लिए भगवान शिव ने नंदी, चंद्र, नाग, गण और अन्य प्रतीकों को यात्रा मार्ग पर छोड़ा और अमरनाथ गुफा में जाकर पार्वती को कथा सुनाई।
कहते हैं कि एक कबूतर का भ्रूण भी कथा सुन रहा था, जिसे अमरता प्राप्त हो गई। आज भी वहां कबूतरों का जोड़ा दिखाई देता है, जिसे शिव-पार्वती का प्रतीक माना जाता है।
ऐतिहासिक संदर्भ
13वीं शताब्दी के इतिहासकार कल्हण ने ‘राजतरंगिणी‘ में अमरनाथ का उल्लेख किया था।
यात्रा 18वीं सदी में तब लोकप्रिय हुई जब बुटा मलिक नामक एक गडरिये को यह गुफा दिखाई दी। मान्यता है कि एक साधु ने उसे कोयले की थैली दी थी, जो घर जाकर सोने में बदल गई। उसी साधु को खोजते हुए बुटा मलिक को बर्फ़ का शिवलिंग और अमरनाथ गुफा मिली।
यात्रा मार्ग और परंपरा
पहलगाम मार्ग (48 किमी) — परंपरागत और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर ।
बालटाल मार्ग (14 किमी) — कठिन लेकिन कम दूरी वाला ।
दोनों मार्गों पर तीर्थयात्रियों के लिए सुव्यवस्थित कैंप, मेडिकल सेवा, टेलीफोन सुविधा और हेली सेवा भी उपलब्ध कराई गई है। अमरनाथ यात्रा 2025, श्रद्धा और सुरक्षा के नए संतुलन के साथ शुरू हुई है। जहां एक ओर धार्मिक आस्था लोगों को खींच लाई है, वहीं दूसरी ओर सरकार ने तकनीक और सुरक्षा के आधुनिक साधनों से यह सुनिश्चित किया है कि हर श्रद्धालु की यात्रा सुरक्षित और सुखद हो।
बर्फ के शिवलिंग की एक झलक पाने को आतुर श्रद्धालुओं की यही पुकार है –
“हर हर महादेव! बम बम भोले!”
