रिपोर्ट, रोहित रजक भोपाल। मध्यप्रदेश में शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate) देश में सबसे ज्यादा है। राज्य में हर 1000 नवजात शिशुओं में से लगभग 40 की मौत हो जाती है। यह जानकारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) और राज्य सरकार की तरफ से विधानसभा में दी गई।

मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मोहन यादव की अनुपस्थिति में यह जवाब स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेश शुक्ला ने कांग्रेस विधायक हूम सिंह सोलंकी के सवाल के जवाब में लिखित रूप से दिया।

राजेश शुक्ला ने बताया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार, वर्ष 2022 में मध्यप्रदेश की शिशु मृत्यु दर प्रति 1,000 जीवित जन्म पर 40 रही। यह दर देश की सबसे अधिक है। इससे पहले वर्ष 2015-16 में यह दर 51 थी, जो अब घटकर 40 पर आई है।

विधानसभा में उठाया गया मुद्दा
विधानसभा सत्र में कांग्रेस विधायक झूमा सोलंकी ने प्रदेश में शिशु मृत्यु दर को लेकर सवाल पूछा था। उन्होंने सरकार से यह जानना चाहा कि प्रदेश में कितने नवजात बच्चों की मौत हुई और सरकार इसके समाधान के लिए क्या कदम उठा रही है।

इस पर जवाब देते हुए मंत्री राजेश शुक्ला ने कहा कि सरकार द्वारा शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनमें संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना, बच्चों का टीकाकरण, नवजात शिशुओं की समय पर जांच और इलाज, मातृ स्वास्थ्य सेवाएं, विशेष नवजात देखभाल इकाई (SNCU) और गृह भ्रमण जैसी योजनाएं शामिल हैं।

क्या है शिशु मृत्यु दर ?
शिशु मृत्यु दर का अर्थ है – एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर। इसे प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर मापा जाता है। यह किसी भी राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को दर्शाने वाला अहम पैमाना होता है।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्यप्रदेश में अब भी ग्रामीण इलाकों में पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं। समय पर इलाज, पोषण की कमी, जन जागरूकता की कमी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति खराब होने से बच्चों की जान बचाना मुश्किल होता है।

सरकार की योजनाएं
राज्य सरकार ने शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए कुछ योजनाएं शुरू की हैं –

जननी सुरक्षा योजना
जन्म के तुरंत बाद नवजात देखभाल
मातृ एवं शिशु टीकाकरण
पोषण अभियान
शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम
संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना

सरकार का कहना है कि इन योजनाओं का असर धीरे-धीरे दिख रहा है और आगामी वर्षों में शिशु मृत्यु दर और कम होने की संभावना है।

मध्यप्रदेश में शिशु मृत्यु दर की स्थिति चिंताजनक है। हालांकि सरकार द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन उन्हें और प्रभावी तरीके से लागू करने की जरूरत है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता और पोषण की सुविधा बढ़ाने से इस गंभीर समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *