रिपोर्ट रोहित रजक भोपाल।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को हनीट्रैप मामले में पेन ड्राइव वाले बयान को लेकर बड़ी राहत मिली है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में उनके खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने यह फैसला गवाहों और सबूतों के अभाव में लिया।
दरअसल, साल 2023 में अधिवक्ता भूपेंद्र सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। उन्होंने दावा किया था कि कमलनाथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि उनके पास हनीट्रैप मामले से जुड़ी भाजपा नेताओं की पेन ड्राइव मौजूद है।
इस पेन ड्राइव में कई आपत्तिजनक वीडियो हैं। याचिकाकर्ता का आरोप था कि कमलनाथ के इस बयान से न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठे, बल्कि यह कानूनन भी अनुचित था।
कोर्ट ने खारिज की याचिका
याचिकाकर्ता भूपेंद्र सिंह ने यह भी कहा था कि अगर कमलनाथ के पास पेन ड्राइव थी, तो उन्होंने पुलिस को सौंपकर जांच में सहयोग क्यों नहीं किया।
इसके बजाय उन्होंने यह बयान देकर सनसनी फैलाई। हाईकोर्ट में यह मामला न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और विनोद कुमार दिवेदी की खंडपीठ के सामने रखा गया।
लेकिन कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता के पास कोई ठोस साक्ष्य या गवाह नहीं हैं, इसलिए इस याचिका को खारिज कर दिया गया।
क्या था हनीट्रैप मामला?
हनीट्रैप मामला 17 सितंबर 2019 को उजागर हुआ था, जब कमलनाथ की सरकार सत्ता में थी। नगर निगम इंदौर के तत्कालीन इंजीनियर हरभजन सिंह की शिकायत पर पलासिया थाने में मामला दर्ज हुआ।
उन्होंने कुछ लड़कियों पर अश्लील वीडियो के जरिए ब्लैकमेल कर 3 करोड़ रुपए मांगने का आरोप लगाया था। पुलिस ने इस मामले में आरती, मोनिका, श्वेता (दो), बरखा समेत 5 महिलाओं को गिरफ्तार किया था। इनके पास से मोबाइल, लैपटॉप, पेन ड्राइव आदि बरामद हुए थे, जिनमें आपत्तिजनक वीडियो और चैट्स थे।
माना गया कि ये महिलाएं हनीट्रैप के जरिए कई बड़े अफसरों और नेताओं को ब्लैकमेल कर रही थीं। जांच में यह भी सामने आया कि कई सरकारी दस्तावेज और फाइलें भी इनके पास मिलीं। पुलिस ने इन सभी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, जो अब जमानत पर बाहर हैं।
कमलनाथ का बयान बना था विवाद का कारण
हनीट्रैप मामला सामने आने के कुछ समय बाद ही कमलनाथ ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि उनके पास भाजपा नेताओं की पेन ड्राइव है और उसमें कई चौंकाने वाली चीजें हैं। यह बयान काफी चर्चा में आया था और उसके बाद राजनीति गर्मा गई थी। भाजपा नेताओं ने कमलनाथ पर आरोप लगाया कि उन्होंने हनीट्रैप जैसे गंभीर मामले का राजनीतिक फायदा उठाने के लिए इस्तेमाल किया।
पुलिस को नहीं दी गई कोई पेन ड्राइव
भाजपा नेताओं ने यह सवाल उठाया कि अगर कमलनाथ के पास सच में पेन ड्राइव थी तो उन्होंने उसे पुलिस को क्यों नहीं सौंपी? क्या वे किसी को ब्लैकमेल कर रहे थे? क्या उनके पास पेन ड्राइव होने की बात झूठी थी? इन्हीं सवालों को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, लेकिन अब कोर्ट ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि कमलनाथ के खिलाफ कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं हैं।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को बड़ी राहत मिली है। उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। यह मामला काफी समय से चर्चा में था, लेकिन अब अदालत के फैसले के बाद यह खत्म होता नजर आ रहा है। हनीट्रैप केस की जांच और कोर्ट की प्रक्रिया भले ही लंबी रही हो, लेकिन इसने मध्यप्रदेश की राजनीति को काफी हद तक प्रभावित किया।
