रिपोर्ट, काजल जाटव: कंबोडिया और थाईलैंड के बीच सीमा का विवाद फिर से गरम हो गया है और इस बार कहानी में शामिल है एक 900 साल पुराना हिन्दू मंदिर प्रीह विहीर, जो भगवान शिव को समर्पित है और उनेस्को विश्व धरोहर के अंतर्गत आता है। यह मंदिर डांगरेक पर्वत की चट्टानों पर, समुद्र तल से लगभग 525 मीटर की ऊंचाई पर बना है। खमेर साम्राज्य के समय से ये स्थल इतिहास, संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं का अहम हिस्सा रहा है। यह न केवल कंबोडियाई लोगों के लिए पवित्र है, बल्कि कई थाई हिंदू समुदायों के श्रद्धास्थान भी है। 

इस विवाद की वजह कई दशक पुरानी है। 1962 में, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने इसे कंबोडिया का हिस्सा माना, मगर इन मंदिरों तक पहुंचने का रास्ता थाईलैंड से गुजरता है, जिससे सीमा का झगड़ा और बढ़ गया है। ता मुएन थॉम मंदिर, जो थाईलैंड के सुरिन प्रांत में लगभग 95 किलोमीटर दूर है, भी इसी संघर्ष का हिस्सा रहा है। ये दोनों ऐतिहासिक स्थल खमेर वास्तुकला और धर्म का प्रतीक हैं, लेकिन अब सिर्फ शांतिपूर्ण इतिहास की बात नहीं रह गई है। 

कम से कम 12 लोगों की मौत

हालिया झड़पें गुरुवार को सीमा पर फिर से हिंसक हो गईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये हिंसक मुठभेड़ पिछले 10 सालों में सबसे भयानक थीं, जिसमें कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई और कई लोग जख्मी हुए। सैंकड़ों लोग अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में चले गए हैं। थाईलैंड का आरोप है कि कंबोडियाई सेना ने ड्रोन लेकर हवाई सर्वेक्षण किया, जिससे तनाव और बढ़ गया और गोलीबारी हो गयी। 

मानवीय संकट और अंतर्राष्ट्रीय चिंता

थाई सैनिकों ने शांति बनाने की कोशिश की, लेकिन संभल नहीं पाया और सुबह 8:20 बजे से भारी गोलीबारी शुरू हो गई। इन संघर्ष के कारण, बहुत सारे नागरिक राहत केंद्रों में पहुंचाए गए हैं। स्कूल, बाजार और मंदिरों की गतिविधियां रोक दी गई हैं। संयुक्त राष्ट्र और आसियान ने चिंता जताई है और दोनों देशों से शांति बनाए रखने का आग्रह किया है।

ये मंदिर हमारे इतिहास और संस्कृति का हिस्सा हैं, लेकिन आज यह विवाद का कारण बन गए हैं। अगर थाईलैंड और कंबोडिया जल्द ही बातचीत और समझौता नहीं करते, तो यह स्थिति और भी बिगड़ सकती है। इससे क्षेत्र की स्थिरता के साथ-साथ इन ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।

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