government schoolसरकारी स्कूल

रोहित रजक, मंदसौर। जिले में अब किसी भी स्कूल में विद्यार्थियों को जर्जर भवनों में नहीं बैठाया जाएगा। यदि कोई स्कूल ऐसा करता है तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर आदित्य गार्ग ने दिए निर्देश

यह निर्देश कलेक्टर आदित्य गर्ग द्वारा साप्ताहिक समय-सीमा की बैठक में सभी विभागों को दिए गए हैं। उन्होंने साफ किया कि बच्चों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है, इसलिए किसी भी हालत में विद्यार्थियों को कमजोर और खतरनाक इमारतों में नहीं बैठाया जाए।

क्या कहा कलेक्टर ने?

कलेक्टर आदित्य गार्ग ने कहा कि जिले के कई सरकारी और निजी स्कूलों में अभी भी पुराने और खस्ताहाल भवनों में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है, जो बेहद खतरनाक है। ऐसे भवन बारिश के समय कभी भी गिर सकते हैं, जिससे जान-माल का नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई विद्यालय प्रशासन लापरवाही करता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कंट्रोल रूम और शिकायत नंबर

कलेक्टर ने नगर पालिका और पंचायत विभाग को निर्देश दिए हैं कि सभी जर्जर भवनों की सूची तैयार करें और उन्हें जल्द से जल्द खाली कराएं। इसके लिए कंट्रोल रूम भी बनाया गया है, जहां आम नागरिक भी शिकायत कर सकते हैं। कंट्रोल रूम का नंबर 07422-235113 है, जो 24 घंटे चालू रहेगा। इस नंबर पर कॉल करके कोई भी नागरिक खतरनाक भवनों की जानकारी दे सकता है। स्कूल शिक्षा विभाग को सख्त निर्देशकलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वे जिले के सभी स्कूलों की इमारतों का निरीक्षण करें और जहां भी भवन जर्जर हों, वहां बच्चों की कक्षाएं तुरंत बंद करवाई जाएं।

जरूरत पड़ने पर अस्थायी रूप से किसी अन्य भवन या टेंट की व्यवस्था की जाए, लेकिन बच्चों की जान को खतरे में नहीं डाला जाए।

बैठक में अधिकारियों की उपस्थिति

इस बैठक में अपर कलेक्टर श्रीमती पूनम जायसवाल, सीईओ जिला पंचायत हिमांशु जैन, जिला शिक्षा अधिकारी, लोक निर्माण विभाग, नगरीय प्रशासन, जनसम्पर्क, महिला बाल विकास, स्वास्थ्य और अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने विभागों में सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कार्य करें।स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारीबैठक में यह भी कहा गया कि कई स्कूल प्रबंधन भवन की मरम्मत करवाने के बजाय बच्चों को उसी जर्जर भवन में बैठाकर पढ़ा रहे हैं।

यह गंभीर लापरवाही है। यदि कोई हादसा होता है तो स्कूल प्रबंधन पूरी तरह जिम्मेदार होगा और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

नगर परिषद और पंचायतों की भूमिका

कलेक्टर ने नगर परिषदों और पंचायतों को भी निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में ऐसे भवनों की पहचान करें जो शिक्षा, स्वास्थ्य या अन्य सेवाओं में उपयोग हो रहे हैं और जिनकी हालत खराब है। इन भवनों को तुरंत खाली कराया जाए या मजबूत बनाया जाए। यदि किसी विभाग को ऐसे भवन की जानकारी मिलती है, तो उसे तुरंत संबंधित अधिकारी को सूचित करना अनिवार्य होगा।

बारिश में बढ़ा खतराहाल ही में जिले में भारी बारिश के कारण कई भवनों की स्थिति और खराब हो गई है। इस कारण यह फैसला लिया गया है कि अब ऐसी जगहों पर बच्चों को नहीं बैठाया जाएगा जहां जान का खतरा हो।

कलेक्टर ने कहा कि इस नियम का सख्ती से पालन किया जाएगा। किसी भी प्रकार की लापरवाही को माफ नहीं किया जाएगा।निष्कर्षकलेक्टर का यह निर्णय विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए एक जरूरी और सराहनीय कदम है। अब देखना यह होगा कि जिले के सभी अधिकारी और स्कूल प्रबंधन इस निर्देश का कितना पालन करते हैं। जिले के नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे जर्जर भवनों की जानकारी तुरंत कंट्रोल रूम पर दें ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके और किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *