
Rishita Gangrade: भोपाल के ऐशबाग क्षेत्र में बने नए रेल ओवर ब्रिज (ROB) की चर्चा इस समय पूरे देश में हो रही है — लेकिन कारण गर्व का नहीं, बल्कि उसकी 90 डिग्री Overbridge की खतरनाक मोड़ वाली डिज़ाइन है। करीब ₹18 करोड़ की लागत से बने इस ब्रिज में एक ऐसा तीव्र मोड़ है, जो वाहन चालकों के लिए बेहद असुरक्षित साबित हो सकता है।
डिज़ाइन की गलती या मज़बूरी?
लोक निर्माण विभाग (PWD) का कहना है कि यह तीव्र मोड़ भूमि की अनुपलब्धता और पास ही में स्थित मेट्रो स्टेशन के कारण बनाया गया। अधिकारियों का तर्क है कि उनके पास बेहतर विकल्प नहीं था। लेकिन तकनीकी विशेषज्ञों और आम नागरिकों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। सोशल मीडिया पर इस ब्रिज का मज़ाक उड़ाया जा रहा है और लोग इसे “डेथ टर्न” तक कह रहे हैं।
सरकार की सख़्त कार्रवाई
इस विवाद के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़ी कार्रवाई करते हुए:
- 7 PWD इंजीनियरों को तत्काल सस्पेंड किया (जिसमें दो चीफ़ इंजीनियर शामिल हैं)
- डिज़ाइन कंसल्टेंट और निर्माण एजेंसी को ब्लैकलिस्ट कर दिया
- एक उच्च स्तरीय तकनीकी समिति गठित की गई जो ब्रिज की सुरक्षा जांच और समाधान तैयार करेगी
अब आगे क्या होगा?
- फिलहाल Overbridge का उद्घाटन रोक दिया गया है
- तकनीकी समिति ने सुझाव दिया है कि मोड़ को थोड़ा बढ़ाकर उसे कर्व में बदला जाए, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना कम हो
- रेलवे से भूमि प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है ताकि ब्रिज की डिज़ाइन को ठीक किया जा सके
जनता और विशेषज्ञों की राय
- यातायात विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की डिज़ाइन “बड़े हादसों को न्योता” देती है
- आम जनता सवाल कर रही है कि इतनी बड़ी डिज़ाइन चूक की मंज़ूरी कैसे मिली?
- यह मामला एक उदाहरण है कि भारत में अक्सर बुनियादी ढांचे को तैयार करते समय प्रोफेशनल प्लानिंग और सुरक्षा मानकों की अनदेखी होती है
निष्कर्ष
भोपाल का 90 डिग्री Overbridge अब केवल एक निर्माण परियोजना नहीं रहा, बल्कि यह योजनाओं में लापरवाही और जवाबदेही की कमी का प्रतीक बन गया है। मुख्यमंत्री द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन यह घटना हमें यह भी याद दिलाती है कि:
सड़कें केवल गंतव्य तक पहुँचाने का ज़रिया नहीं होतीं—वे ज़िंदगियों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी भी होती हैं।
