रिपोर्ट, काजल जाटव: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। स्कॉटलैंड में टर्नबेरी गोल्फ कोर्स पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर से मुलाकात से पहले उन्होंने कहा, अगर उन्होंने समय पर कदम नहीं उठाए होते, तो भारत और पाकिस्तान अभी युद्ध कर रहे होते। ट्रंप ने ये भी कहा कि मई शुरुआत में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 नागरिकों की जान गई थी, के बाद दोनों देश के बीच तनाव बहुत बढ़ गया था।
उनका मानना है कि उन्होंने व्यापार को हथियार बनाकर तनाव कम किया और एक बड़ा युद्ध टल गया। ट्रंप ने बताया, “मैंने दिल्ली और इस्लामाबाद दोनों को साफ-साफ कहा कि अगर आप युद्ध की ओर बढ़ते हैं, तो कोई भी व्यापार समझौता नहीं होगा।”
यह बयानबाजी क्यों?
यह बयान तब आया है जब वह फिर से राष्ट्रपति पद की दौड़ में हैं और अपनी विदेश नीति की सफलता का डंका पीट रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में उन्होंने दुनिया में छह बड़े युद्ध टाले, जिनमें भारत-पाकिस्तान का संघर्ष भी शामिल है। हालांकि, भारत सरकार ने ट्रंप के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। नई दिल्ली ने कहा है कि भारत की विदेश नीति पूरी तरह से स्वतंत्र है, और उसने कभी भी किसी तीसरे की मध्यस्थता नहीं मानी।
10 मई के युद्धविराम में ट्रंप की भूमिका को भारत ने पूरी तरह से गलत बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान खुद को रंगीन करके घरेलू राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है, और वह खुद को एक विश्वसनीय नेता और शांति का प्रतीक दिखाना चाहते हैं। उन्होंने उत्तर कोरिया, अफगानिस्तान और अब भारत-पाकिस्तान जैसे मामलों को अपनी “शांति कोशिशों” की लिस्ट में शामिल किया है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
भारत में ट्रंप के इस बयान पर खूब प्रतिक्रियाएं आई हैं। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने संसद में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर बोलते हुए कहा, “…डोनाल्ड को चुप करा दो, या फिर भारत में मैकडॉनल्ड्स बंद कर दो…” यह बात ट्रंप की कथित बयानबाजी और भारत में उनकी छवि को लेकर है। भारत और पाकिस्तान के रिश्ते स्वभाव से ही संवेदनशील और रणनीतिक होते हैं। जब भी उनके बीच तनाव होता है, खासकर आतंकी घटनाओं से जुड़ा हो, अमेरिका या ट्रंप जैसे नेता सिर्फ “व्यापार की धमकी” देकर इन सब को कैसे रोक सकते हैं। यह व्यावहारिक नहीं है।
ट्रंप का यह दावा उन्हें अमेरिका की राजनीति में सुर्खियों में तो लाता है, लेकिन भारत की संप्रभुता और कूटनीति के लिहाज से वह सही नहीं है। भारत ने हमेशा आतंकवाद और सीमा पर हिंसा के मसलों पर अपनी स्पष्ट नीति रखी है, और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को मान्यता नहीं दी है। ट्रंप का यह दावा ज्यादा शायद चुनावी स्वार्थ का हिस्सा ही है।
