रानू यादव: भारत के छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित अंबिकापुर शहर में यह अद्भुत पहल की गई है। इस पहल को गार्बेज कैफे नाम दिया गया है।
गार्बेज कैफे का उद्देश्य लोगों को शहर को स्वच्छ रखने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके तहत, यदि आप एक किलो प्लास्टिक कचरा लाते हैं, तो आपको भरपेट खाना मिलता है, और आधा किलो कचरा लाने पर आपको भरपेट नाश्ता दिया जाता है।
यह योजना न केवल शहर को स्वच्छ बनाने में मदद कर रही है, बल्कि गरीब और बेघर लोगों को भोजन भी उपलब्ध करा रही है। यह अंबिकापुर नगर निगम और शहर के निवासियों के बीच एक सफल साझेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है।
यह भारत की एक अनूठी और प्रेरक पहल है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यह केवल एक कैफे नहीं है, बल्कि एक सामाजिक और पर्यावरणीय समाधान का बेहतरीन उदाहरण है।
गार्बेज कैफे का उद्देश्य?
अंबिकापुर को स्वच्छता में देश के अग्रणी शहरों में गिना जाता है। इस सफलता के पीछे एक प्रमुख कारण वहां का मजबूत कचरा प्रबंधन तंत्र है। लेकिन शहर को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए नगर निगम ने एक रचनात्मक और प्रभावी तरीका खोजा – गार्बेज कैफे की शुरुआत करना। यह कैफे नगर निगम द्वारा चलाया जाता है और इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को अपने घरों और गलियों से प्लास्टिक कचरा इकट्ठा करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
इस मॉडल का नियम क्या कहता है?
अगर कोई व्यक्ति 1 किलो प्लास्टिक कचरा जमा करके लाता है, तो उसे कैफे में भरपेट भोजन मिलता है। वहीं, आधा किलो कचरा लाने पर भरपेट नाश्ता दिया जाता है।
गरीबों और बेघर लोगों के लिए वरदान!
इस योजना ने उन बेघर और गरीब लोगों को एक गरिमापूर्ण तरीका दिया है, जिससे वे बिना किसी से मांगे भोजन प्राप्त कर सकें। वे प्लास्टिक कचरा इकट्ठा करते हैं और उसके बदले में उन्हें पौष्टिक भोजन मिल जाता है।
प्लास्टिक का क्या उपयोग:
कैफे में जमा किए गए प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल सड़कों के निर्माण में किया जाता है। प्लास्टिक को डामर के साथ मिलाकर मजबूत और टिकाऊ सड़कें बनाई जाती हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि प्लास्टिक पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाए। इस पहल ने न केवल अंबिकापुर को स्वच्छ रखने में मदद की है, बल्कि यह भी दिखाया है कि कचरा एक समस्या नहीं, बल्कि एक संसाधन हो सकता है। यह स्थानीय सरकार, नागरिक समाज और नागरिकों के बीच एक सफल साझेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है।
इसकी शुरुआत कब हुई?
भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के अंबिकापुर शहर में “कचरा लाइए और भरपेट टेस्टी खाना खाइए” नामक पहल की शुरुआत 2019 में हुई थी। इसे देश का पहला “गार्बेज कैफे” भी कहा जाता है। इस अनूठी पहल के कारण ही अंबिकापुर को देश के सबसे स्वच्छ शहरों में से एक माना जाता है और कई अन्य शहरों ने भी इस मॉडल को अपनाया है।
इस मॉडल की शुरुआत किसने की?
यह मॉडल अंबिकापुर नगर निगम (Ambikapur Municipal Corporation) द्वारा बनाया और चलाया गया है। अंबिकापुर के तत्कालीन मेयर अजय तिर्की ने इस पहल की शुरुआत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह मॉडल स्वच्छ भारत मिशन के तहत शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य शहर की स्वच्छता को बढ़ाना और प्लास्टिक कचरे का सही प्रबंधन करना था। इस पहल में नगर निगम की टीम ने स्वच्छता दीदियों (स्वयं सहायता समूह की महिलाएं) के सहयोग से घर-घर से कचरा इकट्ठा करने और उसे पुनर्चक्रण के लिए भेजने का एक प्रभावी तंत्र स्थापित किया।
इस प्रकार, यह एक व्यक्ति विशेष की बजाय एक सामूहिक और संस्थागत पहल है, जिसमें अंबिकापुर नगर निगम और शहर के नागरिकों का सक्रिय योगदान शामिल है।
कैफे का स्वामित्व किसका है?
कैफे के दैनिक संचालन का जिम्मा किसी निजी ऑपरेटर या समूह को सौंपा गया है, लेकिन इसका स्वामित्व और समग्र प्रबंधन नगर निगम के पास ही है। यह एक सरकारी पहल है, जो सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) के मॉडल पर काम करती है।
