रिपोर्ट रोहित रजक/नई दिल्ली। 21 जुलाई 2025 की रात देश को एक चौंकाने वाली खबर मिली। भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इस्तीफे की वजह स्वास्थ्य कारण बताई, लेकिन इसके पीछे कई सवाल और संभावनाएं खड़े हो गए हैं।
इस दिन उन्होंने पहले राज्यसभा की कार्यवाही चलाई, शाम को विपक्षी नेताओं से मुलाकात की, और रात को राष्ट्रपति को पत्र सौंपकर इस्तीफा दे दिया। यह घटनाक्रम इतनी तेजी से हुआ कि राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई।

जगदीप धनखड़ का राजनीतिक और संवैधानिक सफर: एक महत्वपूर्ण पड़ाव
जन्म और शिक्षा:
18 मई 1951 को राजस्थान के झुंझुनूं जिले के किठाना गांव में जन्मे जगदीप धनखड़ ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बीएससी और एलएलबी की पढ़ाई की। एक साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।
राजनीतिक सफर की शुरुआत से उपराष्ट्रपति पद तक:
- 1989: जनता दल के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया।
- 1990: चंद्रशेखर सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे।
- 2019: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल नियुक्त हुए, जहां उन्होंने कई बार राज्य सरकार के साथ संवैधानिक बहसों में भाग लिया।
- 2022: एनडीए के उम्मीदवार के रूप में भारत के 14वें उपराष्ट्रपति चुने गए।
उपराष्ट्रपति के रूप में कार्यशैली:
धनखड़ ने अपने कार्यकाल में बार-बार दोहराया कि संसद “जनता की आवाज” है और इसमें किसी की आवाज दबनी नहीं चाहिए। वे:
- संसद में अनुशासन के प्रबल समर्थक रहे।
- कार्यवाही बाधित होने पर कठोर टिप्पणियों से चर्चा में रहे।
- विपक्ष को पूरी सुनवाई का अवसर देते हुए निष्पक्ष संचालन करते थे।
- सोशल मीडिया के माध्यम से लोकतंत्र को जनभागीदारी का माध्यम मानते रहे।
इस्तीफा: स्वास्थ्य कारण या राजनीतिक मतभेद?
धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने की बात कही, जिसे राष्ट्रपति भवन ने औपचारिक रूप से स्वीकार किया। लेकिन इस कदम ने कई राजनीतिक अटकलों को भी जन्म दिया:
- क्या उनके और सरकार के बीच कुछ मतभेद थे?
- क्या विपक्ष के साथ उनकी संवाद की कोशिशों को लेकर भीतर ही भीतर असहमति पनप रही थी?
- क्या वे राज्यसभा की गरिमा बनाए रखने के लिए सत्ता और विपक्ष दोनों से टकराव की स्थिति में तटस्थ रहते हुए दबाव में आ गए थे?
कई विश्लेषकों का मानना है कि उनका रुख पारंपरिक रूप से सरकार-समर्थक उपराष्ट्रपतियों से अलग था, और शायद यही बात इस्तीफे की पृष्ठभूमि बनी।
