रिया सिन्हा: पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि (26 दिसंबर, 2025) पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। 26 दिसंबर, 2024 को 92 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ था। कांग्रेस पार्टी ने उन्हें एक ऐसे राजनेता के रूप में याद किया, जिनके नेतृत्व ने न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को भी सुरक्षित रखा। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जारी संदेश में कहा कि भारत उनके निस्वार्थ सेवा भाव और दूरदर्शी सोच के लिए हमेशा उनका ऋणी रहेगा।
कांग्रेस का संदेश: मजबूत अर्थव्यवस्था का आधार
डॉ. मनमोहन सिंह को आधुनिक भारत के आर्थिक सुधारों का वास्तुकार माना जाता है। 1991 में वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने ‘लाइसेंस राज’ को समाप्त कर उदारीकरण की नींव रखी, जिसने भारत को वैश्विक बाजार से जोड़ा। उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल (2004-2014) के दौरान भारत ने 8-9% की रिकॉर्ड जीडीपी विकास दर हासिल की। कांग्रेस ने रेखांकित किया कि सिंह के आर्थिक कौशल के कारण ही 2008 की वैश्विक मंदी के दौरान भी भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर रही और करोड़ों लोग गरीबी रेखा से बाहर निकल सके।
लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा: RTI और MGNREGA की विरासत
आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ डॉ. सिंह ने लोकतंत्र को अधिकार-आधारित शासन के माध्यम से मजबूती दी। उनके कार्यकाल में लागू किए गए सूचना का अधिकार (RTI) कानून ने सरकारी कामकाज में पारदर्शिता की नई मिसाल पेश की। वहीं, मनरेगा (MGNREGA) जैसी योजनाओं ने ग्रामीण भारत में रोजगार की गारंटी देकर सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया। कांग्रेस के अनुसार, डॉ. सिंह ने कभी भी अपनी राजनीति को लोकतांत्रिक संस्थाओं से ऊपर नहीं रखा और हमेशा एक सौम्य एवं गरिमापूर्ण संवाद की राजनीति को बढ़ावा दिया।
निष्कर्ष: भारत के महान सपूत को नमन
डॉ. मनमोहन सिंह की पहचान उनके बौद्धिक सामर्थ्य, ईमानदारी और विनम्रता के लिए रही है। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार सहित कई बड़े नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि डॉ. सिंह का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने सुधारों के साथ-साथ करुणा (Compassion) को भी शासन का हिस्सा बनाया। आज उनकी कमी देश को एक ऐसे संकटमोचक और ‘मौन’ कर्मयोगी के रूप में खलती है, जिसका काम हमेशा उसकी बातों से अधिक प्रभावशाली रहा।

